कौन होगा देश का अगला उपराष्ट्रपति? NDA को बहुमत का भरोसा, INDIA गठबंधन भी मैदान में

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली। देश में एक बार फिर बड़े संवैधानिक पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उपराष्ट्रपति पद खाली होने के बाद अब सभी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी INDIA गठबंधन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं और दोनों खेमों में उम्मीदवारों के नाम पर गहन मंथन चल रहा है।

चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है और राज्यसभा महासचिव को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद NDA की उच्चस्तरीय बैठक होने की संभावना है, जिसमें उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ऐसे अनुभवी और वैचारिक रूप से मजबूत चेहरे को उम्मीदवार बना सकती है, जो संगठन से जुड़ा हो और सहयोगी दलों की सहमति भी रखता हो।

हरिवंश बन सकते हैं NDA के चेहरे?

सूत्रों का मानना है कि जेडीयू से राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का नाम भी प्रबल दावेदारों में शामिल है। वे ओबीसी समुदाय से आते हैं और सरकार से उनके रिश्ते भी सकारात्मक बताए जा रहे हैं। हालांकि बीजेपी अक्सर चौंकाने वाले नामों को सामने लाती रही है, जिससे स्थिति और रोचक हो जाती है।

क्या कहता है आंकड़ों का गणित?

लोकसभा में NDA के पास 293 सांसदों का समर्थन है, जबकि INDIA गठबंधन के पास 234 सांसद हैं। राज्यसभा में NDA के पास लगभग 130 और विपक्ष के पास करीब 79 सांसद हैं। दोनों सदनों में कुल 782 सदस्य हैं और उपराष्ट्रपति पद जीतने के लिए 392 वोटों की आवश्यकता होगी। आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो NDA के पास करीब 423 सांसदों का समर्थन है, जिससे उनके उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

विपक्ष भी पीछे हटने के मूड में नहीं

हालांकि संख्या बल में पीछे होने के बावजूद, INDIA गठबंधन भी अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारने की तैयारी में है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि INDIA गठबंधन की बैठक जल्द होगी और एकजुट होकर निर्णय लिया जाएगा। विपक्ष का मानना है कि भले ही जीत संभव न हो, लेकिन इस चुनाव में भागीदारी राजनीतिक संदेश देने के लिहाज से जरूरी है।

धनखड़ के इस्तीफे से खाली हुआ पद

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हाल ही में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र भेजकर कहा कि वे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहते हैं और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए पद छोड़ रहे हैं। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, इसलिए यह पद जल्द भरे जाना संसदीय व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है।

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