छत्तीसगढ़ में ‘कस्टम मिलिंग स्कैम’ की जांच अब एक बड़े घोटाले की चरणबद्ध रूप से सामने आ रही है, जिसमें राज्य के लगभग 2700 चावल मिलरों से अवैध वसूली करके करीब ₹140 करोड़ एकत्रित किए गये। आरोप के अनुसार ये वसूली प्रति क्विंटल चावल पर ₹20 की दर से की गयी थी ।
2. सिंडिकेट का संचालन
जाल में प्रमुख भूमिका निभाने वाले दो मुख्य व्यक्तियों में मनोज (सिंडिकेट-ऑपरेटर) और अनवर ढेबर (कारोबारी), जिनके आदेशों पर यह आपरेशन 33 जिलों में कार्यान्वित किया गया, शामिल हैं। साथ ही रामगोपाल को इस नेटवर्क का ‘खज़ाना-रक्षाकर्ता’ कहा जा रहा है, जिसने वसूली की राशि को इकट्ठा और संग्रहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
3. जांच एजेंसियों की एक्शन
इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने मामला गंभीरता से लिया और कई आरोपियों को सरेआम पूछताछ के लिए रिमांड पर भेजा।
इकोनॉमिक क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (ECIB) ने सेवानिवृत्त IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और व्यवसायी अनवर ढेबर को विशेष अदालत के सामने पेश किया गया, जो नए सबूत जुटाने के लिए पूछताछ की प्रक्रिया में हैं ।
4. पर्दाफाश की आवश्यकता
भारतीय खाद्य प्रणाली में चावल एक बुनियादी वस्तु है। यदि मिलता-जुलता भ्रष्टाचार और कमीशन की व्यवस्था संगठित रूप से फैलती है, तो इसका गंभीर प्रभाव उपभोक्ताओं, किसानो और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर पड़ता है। ऐसे में आरोपियों की गिरफ्तारी और नेटवर्क को तोड़ना जरूरी था।
5. अवशेष जांच और संभावित परिणाम
रिमांड में पूछताछ जारी है और आगे के कार्रवाइयों के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
जांच का दायरा बढ़कर सिंडिकेट के अन्य हाई-प्रोफ़ाइल सदस्यों तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
दोषी पाए जाने पर आरोपियों पर राशी की वसूली की राशि की रिकवरी और कड़ी सजाओं का मामला बनेगा।







