रीवा ज़िले से महज 10 किलोमीटर दूर स्थित भोलगढ़ पंचायत के महिदल गांव का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्कूली बच्चे बेहद दुर्गम और खतरनाक रास्तों से होकर रोजाना स्कूल जाते नजर आ रहे हैं।
इन बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए न केवल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, बल्कि जीवन को जोखिम में डालते हुए पगडंडियों, उबड़-खाबड़ रास्तों और नदी-नालों से गुजरना पड़ता है। यह वीडियो देखकर हर संवेदनशील नागरिक का दिल पसीज उठेगा।
देश को आज़ाद हुए 75 से अधिक वर्ष बीत चुके हैं और हम “डिजिटल इंडिया” और “शिक्षित भारत” की बात करते हैं, लेकिन विकास के इन बड़े-बड़े दावों के बीच अगर हम बच्चों को स्कूल तक पहुँचने का एक सुरक्षित रास्ता तक नहीं दे पाए हैं, तो इससे ज़्यादा शर्मनाक और कुछ नहीं हो सकता।
ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार शिकायत की है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। यह मुद्दा केवल महिदल गांव का नहीं, बल्कि देश के कई ग्रामीण इलाकों की हकीकत को उजागर करता है, जहाँ शिक्षा आज भी संघर्ष का विषय बनी हुई है।



