बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सत्यापन अभियान (एसआईआर) के तहत एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। चुनाव आयोग द्वारा जारी जानकारी में बताया गया कि राज्य की वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के नाम शामिल पाए गए हैं। यह मामला न केवल प्रशासनिक चूक को दर्शाता है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की गंभीरता पर भी सवाल उठाता है।
मुख्य विषय:
चुनाव आयोग की ओर से यह बताया गया कि बिहार की मतदाता सूची में नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देशों के नागरिकों के नाम शामिल हैं। यह स्थिति मतदाता सत्यापन अभियान ‘डोर टू डोर’ के दौरान सामने आई। जांच में पाया गया कि इन विदेशी नागरिकों के पास न केवल वोटर कार्ड है, बल्कि आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसी भारतीय पहचान दस्तावेज भी मौजूद हैं।
कार्रवाई और प्रतिक्रिया:
चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि अंतिम मतदाता सूची से इन सभी अवैध नामों को हटाया जाएगा। आयोग का उद्देश्य ही अवैध मतदाताओं को सूची से बाहर करना है। हालांकि, इस खुलासे ने राजनीतिक गलियारों में उथल-पुथल मचा दी है। विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस और महागठबंधन के अन्य घटक दल, इस मामले को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं और विरोध जता रहे हैं।



