नई दिल्ली:सोमवार को दोपहर 3:16 बजे एक विशाल उल्कापिंड 2025 एनजे पृथ्वी की कक्षा के बेहद समीप से लगभग 22.4 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजरा। यह उल्कापिंड लगभग 85 फीट चौड़ा था और इसकी गति 48,800 किलोमीटर प्रति घंटा थी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पिंड संभावित खतरनाक श्रेणी में आता है और 15 सितंबर 2028 को यह पुनः पृथ्वी के पास आएगा।
नासा और ESA की सतत निगरानी
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) लगातार इस उल्कापिंड की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। यह पिंड अपोलो वर्ग और एटेन समूह का हिस्सा है, जो सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते हैं और समय-समय पर पृथ्वी की कक्षा को पार करते हैं।
पृथ्वी के लिए चेतावनी संकेत
हालांकि अभी इसके टकराने का कोई खतरा नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि ऐसे पिंड भविष्य में पृथ्वी के लिए संभावित खतरा बन सकते हैं। यही कारण है कि वैश्विक संस्थाएं इसकी गति, आकार और मार्ग का गहराई से विश्लेषण कर रही हैं।
इसरो भी कर रहा है नजरबानी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भी इस गतिविधि को लेकर सतर्क है। भारत सहित NASA, ESA और जापानी एजेंसी JAXA मिलकर ऐस्टेरॉयड ट्रैकिंग और डिफ्लेक्शन मिशन पर कार्य कर रहे हैं। भविष्य में ISRO की योजना ऐसे उल्कापिंडों पर उतरकर उनकी संरचना का अध्ययन करने की भी है।



