छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: कुष्ठ रोगियों की बढ़ती संख्या और भ्रष्टाचार के बीच गरियाबंद में गार्ड ने लगाया इंजेक्शन

Madhya Bharat Desk
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रायपुर/गरियाबंद।
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाहियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। राजधानी रायपुर से लेकर गरियाबंद तक हालात सरकार के दावों की सच्चाई उजागर कर रहे हैं।

रायपुर: कुष्ठ रोग नियंत्रण विभाग के कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्त

राजधानी रायपुर में कुष्ठ रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन स्थिति सुधारने के बजाय विभाग के कर्मचारी भ्रष्टाचार और राजनीति में डूबे नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, चेतन सिन्हा, जो मूल रूप से ग्रेड-2 कर्मचारी हैं और जिनकी नियुक्ति कुष्ठ रोग नियंत्रण विभाग, पंडरी में है, लंबे समय से रायपुर सीएमएचओ ऑफिस में अटैच होकर कार्यरत हैं। आरोप है कि वे अपने पद का दुरुपयोग कर घूसखोरी और कर्मचारी संघ की राजनीति में सक्रिय हैं।

हालांकि इस मामले में कई शिकायतें सामने आईं, लेकिन अब तक रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह और सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। सवाल यह है कि क्या प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है या फिर भ्रष्ट कर्मचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है?

प्रदेश की यह स्थिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कुष्ठ रोग मुक्त भारत” अभियान को कमजोर करती दिख रही है।

गरियाबंद: गार्ड ने मरीज को लगाया इंजेक्शन

इधर गरियाबंद जिला अस्पताल से भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां मंगलवार को महिला गार्ड ने नर्स की जगह मरीज को इंजेक्शन लगाया।
पूर्व पार्षद योगेश बघेल जब अपने भतीजे को इलाज के लिए अस्पताल लाए, तो उन्होंने देखा कि महिला मरीज को इंजेक्शन लगाने का काम गार्ड कर रही थी। यह मामला सामने आते ही हड़कंप मच गया।

वायरल तस्वीरों के बाद कलेक्टर भगवान यूइके ने गरियाबंद सीएमएचओ वीएस नवरत्न और सिविल सर्जन यशवंत ध्रुव को कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही सिविल सर्जन ने बताया कि जिस डॉक्टर और नर्स की मौजूदगी में यह लापरवाही हुई, उन पर भी शो-कॉज नोटिस दिया जाएगा।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य मंत्री और प्रशासन

लगातार हो रही इन घटनाओं ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रायपुर और गरियाबंद जैसे जिलों से सामने आ रही लापरवाहियां और भ्रष्टाचार सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं।

लोग अब जानना चाहते हैं कि आखिर कब दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, ताकि मरीजों की जान से खिलवाड़ और भ्रष्टाचार पर रोक लग सके।

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