रायपुर के घरौंदा सेंटर में 8 बच्चों की मौत और 5 के लापता होने के दावों के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले पर गंभीरता दिखाई है। न्यायालय ने नियुक्त कोर्ट कमिश्नरों से केंद्रों की वास्तविक स्थिति पर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
यह मामला रायपुर की सामाजिक संस्था कोपलवाणी की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में घरौंदा केंद्रों में रहने वाले बच्चों को मिलने वाले भोजन, चिकित्सा, आवास और सुरक्षा की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में 11 अधिवक्ताओं को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। इनमें विवेक श्रीवास्तव, अपूर्व त्रिपाठी, संघर्ष पांडेय, शिवाली दुबे और ईश्वर जायसवाल शामिल हैं।
कोर्ट कमिश्नरों को राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं से संचालित घरौंदा केंद्रों का निरीक्षण करने का दायित्व दिया गया है। उन्हें वहां उपलब्ध सुविधाओं, रहने की स्थिति, भोजन और स्वास्थ्य देखभाल की जमीनी हकीकत न्यायालय के समक्ष रखनी है।
अदालत में राज्य सरकार की ओर से वित्त विभाग, समाज कल्याण विभाग के सचिवों और मुख्य सचिव स्तर से हलफनामे प्रस्तुत किए गए। सरकार ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में घरौंदा केंद्रों के हितग्राहियों पर लगभग 9 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
इसके बावजूद केंद्रों में वास्तव में कितनी सुविधाएं उपलब्ध हैं, यही मुख्य सवाल अदालत के सामने है। न्यायालय ने पहले भी केंद्रों की बदहाली और निरीक्षण रिपोर्टों में सामने आई कमियों पर सख्त रुख अपनाया था।
कोपलवाणी ने इससे पहले राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत भी की थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा और अदालत ने शासन से जवाब मांगा था।





