रात में सपना, सुबह फरमान! 10वीं-12वीं के परीक्षा केंद्र बदलने पर बवाल

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

रायपुर।छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के पूर्व सदस्य और शिक्षाविद संजय जोशी ने ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के केंद्र बदलने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि इस फैसले से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

संजय जोशी ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी जमीनी हकीकत से दूर हैं। उन्हें विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं की चिंता नहीं है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में हायर सेकेंडरी स्कूलों के बीच की दूरी 10 से 12 किलोमीटर तक होती है। वहीं, कई अंदरूनी इलाकों में आने-जाने के लिए परिवहन की उचित व्यवस्था भी नहीं है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों के लिए एक-एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में उन्हें परीक्षा देने के लिए 10 से 12 किलोमीटर दूर भेजने का फैसला कई सवाल खड़े करता है। इसका सबसे ज्यादा असर छात्राओं पर पड़ सकता है। दूर परीक्षा केंद्र होने से उन्हें आने-जाने में परेशानी होगी और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ेंगी। दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में अच्छी सड़कों की कमी भी एक बड़ी समस्या है।

संजय जोशी ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को रात में सपने आते हैं और सुबह उन फैसलों को लागू कर दिया जाता है। किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले उसकी व्यावहारिकता, उपयोगिता और संभावित असर पर ठीक से विचार नहीं किया जाता।

पुरानी व्यवस्था में सुधार का दिया सुझाव

संजय जोशी ने कहा कि परीक्षा केंद्र बदलने के बजाय छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल पुरानी व्यवस्था में ही सुधार कर सकता था। इसके लिए परीक्षा केंद्र में बाहरी केंद्राध्यक्ष के साथ दो अन्य स्कूलों के प्राचार्यों को सहायक केंद्राध्यक्ष बनाया जा सकता था।

इसके अलावा, राज्य सरकार के तहसीलदार, नायब तहसीलदार या अन्य विभागों के राजपत्रित अधिकारियों को पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) बनाकर परीक्षा के तीन घंटे के दौरान केंद्र में तैनात किया जा सकता था। इससे परीक्षा व्यवस्था की निगरानी भी होती और विद्यार्थियों को दूर परीक्षा देने जाने की परेशानी से भी बचाया जा सकता था।

परीक्षा केंद्र बदलने का फैसला वापस लेने की मांग

संजय जोशी ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल अपनी परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने के बजाय विद्यार्थियों को परेशानी में डाल रहा है। उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बोर्ड परीक्षा केंद्र बदलने के फैसले को वापस लेने की मांग की है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment