रायपुर।शहर की भागदौड़ के बीच हमारे आसपास मौजूद प्रकृति और वन्यजीवन को अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन रायपुर के विद्यार्थियों ने अपने कैमरों के जरिए इसी अनदेखी दुनिया को सामने लाने की कोशिश की है। वन्यजीव सप्ताह 2026 के तहत आयोजित ‘हमारे आसपास वन्यजीव—रील निर्माण प्रतियोगिता’ में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता के साथ स्थानीय जैव विविधता को कैमरे में कैद किया।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने घर, स्कूल और आसपास के इलाकों में नजर आने वाले पक्षियों, कीटों और दूसरे छोटे जीवों को रिकॉर्ड किया। किसी ने बिजली के तार पर बैठे पक्षियों को कैमरे में उतारा तो किसी ने पेड़ की टहनियों पर बैठी ड्रैगनफ्लाई और आसपास की हरियाली को अपनी रील का हिस्सा बनाया।


26 विद्यार्थियों की प्रविष्टियों ने खींचा ध्यान
इस पहल में रायपुर के अलग-अलग स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। प्रतियोगिता के लिए कुल 26 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। खास बात यह रही कि प्रतिभागियों ने सिर्फ वन्यजीवों के वीडियो ही नहीं बनाए, बल्कि उनके आसपास मौजूद प्राकृतिक संकेतों को भी अपनी प्रस्तुतियों में शामिल किया।
विद्यार्थियों ने पदचिह्न, पंख, घोंसले और भोजन के स्थान जैसी चीजों को भी रिकॉर्ड कर यह दिखाने की कोशिश की कि वन्यजीवन केवल जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे आसपास भी उसकी मौजूदगी है।

छोटी-सी प्रकृति, बड़ा संदेश
इन रील्स की सबसे खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने उन जीवों और वनस्पतियों पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें आमतौर पर लोग आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं। उनके कैमरे ने प्रकृति के ऐसे छोटे-छोटे हिस्सों को सामने रखा, जो स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इस प्रतियोगिता का आयोजन रायपुर वन मंडल और छत्तीसगढ़ वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने कलिंगा विश्वविद्यालय के ग्रीन क्लब एवं प्राणीशास्त्र विभाग के सहयोग से किया।
युवाओं को प्रकृति से जोड़ने की पहल
वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में आयोजित इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब लाना और उनके भीतर वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना था। रील जैसे युवाओं के लोकप्रिय माध्यम का इस्तेमाल कर वन्यजीव संरक्षण का संदेश नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की गई।
इस वर्ष वन्यजीव सप्ताह की थीम ‘जुड़े आवास, समृद्ध वन्यजीवन’ रखी गई है। प्रतियोगिता ने इसी विचार को स्थानीय स्तर पर सामने लाते हुए यह संदेश दिया कि वन्यजीवों के लिए बड़े जंगलों के साथ-साथ छोटे प्राकृतिक आवासों का सुरक्षित रहना भी जरूरी है। इनके संरक्षण में समाज और खासकर युवा पीढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।






