छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार में नई कोयला खदान के खिलाफ लगातार आंदोलन हुए, जिसके बाद जिंदल समूह ने ‘जनभावना’ का हवाला देते हुए खदान शुरू करने से इनकार कर दिया था; लेकिन अब वही कंपनी जनता को धोखे में रखकर खदान संचालन की तैयारी में जुट गई है। इसी इलाके में जंगल कटाव और खदान विस्तार के बीच सैकड़ों हाथी मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहे हैं, जो स्थानीय स्तर पर बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
तमनार रेंज में 49 हाथियों के दो दल पिछले 15 दिनों से इलाके में घूम रहे हैं। बुधवार शाम सामारूमा-अमलीडीह के बीच हाथियों का दल सड़क पर पहुंच गया, जहां एक हाथी बीच सड़क पर ही बैठ गया, जबकि बाकी हाथी सड़क किनारे खड़े रहे। हाथियों को देखकर वन विभाग ने दोनों ओर वाहनों की आवाजाही रोक दी और हाथी मित्र दल की निगरानी में पूरा दल सड़क पार कर जंगल की ओर गया, इसके बाद यातायात बहाल किया गया। हर शाम करीब 5 बजे के बाद हाथियों के सड़क पर आने से रायगढ़-घरघोड़ा-धरमजयगढ़ मार्ग पर कुछ देर यातायात थम रहा है।
‘जनभावना’ से इनकार, अब फिर तैयारी?
तमनार ब्लॉक के गारे पेलमा सेक्टर-I कोयला ब्लॉक में प्रस्तावित खदान के खिलाफ 14 गांवों के निवासियों ने लंबे समय तक आंदोलन किया, जिसमें सड़क जाम, धरने और कई बार हिंसक झड़पें भी हुई। दिसंबर 2025 में हुई पब्लिक सुनवाई के परिणाम को रद्द करने, जमीन न देने और पर्यावरण-रोजगार के सवालों को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
इन दबावों के बीच जिंदल समूह की कंपनियों ने सार्वजनिक तौर पर ‘जनभावना’ का हवाला देते हुए खदान शुरू नहीं करने की बात कही थी। लेकिन अब इन चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है कि कंपनी प्रशासन और स्थानीय नेताओं के सहयोग से धीरे-धीरे खदान संचालन की तैयारी फिर से शुरू कर रही है, जबकि जमीन अधिग्रहण, मुआवजा और रोजगार जैसे मसले अभी भी विवादित बने हुए हैं।
हाथियों का बस्तियों की ओर बढ़ना: पर्यावरणीय संकट का संकेत
तमनार इलाके में कोयला खदानों के विस्तार और जंगल कटाव के बीच हाथियों का मानव बस्तियों की ओर आना बड़ी चिंता का विषय बन गया है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रायगढ़ वन मंडल के तमनार और आसपास के रेंज में सैकड़ों हाथी सक्रिय हैं, जो रात में खेतों में घुसकर फसलें भी नष्ट कर रहे हैं।
हाथियों के सड़क पर आने और खदान क्षेत्र के पास डेरा डालने की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि जंगल-खदान-इंसान के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे भविष्य में और अधिक संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। एक तरफ कंपनी खदान शुरू करने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ वन्यजीव इंसानी इलाकों में आने लगे हैं, जो विकास के नाम पर हो रहे पर्यावरण विनाश की ओर इशारा करता है।





