परंपरागत खेती से आगे बढ़ रहे किसान, सुगंधित फसलों ने खोले आय के नए रास्ते

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

रायपुर।छत्तीसगढ़ में सुगंधित और औषधीय फसलों की खेती किसानों के लिए आय का एक नया जरिया बन रही है। राज्य सरकार के कृषि आधारित आजीविका संवर्धन के प्रयासों के तहत किसानों को पारंपरिक खेती के साथ कम लागत और बेहतर मुनाफे वाली फसलों से जोड़ा जा रहा है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड इस दिशा में काम कर रहा है।

बोर्ड की ओर से किसानों को सुगंधित फसलों की खेती के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे कम उपजाऊ और बंजर जमीन का भी उपयोग हो रहा है। साथ ही, स्व-सहायता समूहों और किसान समूहों को स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

खेत के पास ही तेल निकालने की सुविधा

किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और प्रसंस्करण का खर्च कम करने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में 13 फील्ड डिस्टिलेशन यूनिट (आसवन इकाइयां) स्थापित की गई हैं। ये इकाइयां मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी, कोरिया, सूरजपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरबा, बिलासपुर, महासमुंद और गरियाबंद जिलों में संचालित हैं।

इन इकाइयों की मदद से किसान खेत के पास ही सुगंधित पौधों से एसेंशियल ऑयल निकाल पा रहे हैं। इससे परिवहन का खर्च बचता है और किसानों को सीधे तेल बेचकर बेहतर मुनाफा कमाने का अवसर मिल रहा है।

लेमनग्रास और खस की खेती पर जोर

प्रदेश में सुगंधित फसलों के तहत अलग-अलग फसलों की खेती की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • लेमनग्रास: लगभग 250 एकड़
  • खस (वेटिवर): लगभग 127 एकड़
  • सिट्रोनेला: लगभग 29 एकड़
  • पचौली: लगभग 8 एकड़
  • पामारोजा: प्रायोगिक स्तर पर खेती

कम जोखिम, बाजार में अच्छी मांग

लेमनग्रास, खस और पामारोजा जैसी फसलों को किसानों के लिए संभावनाओं वाली फसल माना जा रहा है। इनकी खेती से पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। सुगंधित तेलों की बाजार में मांग बनी रहने के कारण किसानों को अपनी उपज के बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।

सरकार और बोर्ड का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना और कृषि आधारित आजीविका को मजबूत बनाना है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुगंधित फसलों की खेती को प्रदेश में नई संभावनाओं के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment