सरगीगुड़ा में राशन व्यवस्था बदहाल! 35 किलो राशन के लिए 4 KM पैदल संघर्ष

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

जगदलपुर। सरकार मंचों से गांवों के विकास और ग्रामीणों को सुविधाएं मुहैया कराने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग तस्वीर दिखा रही है। जगदलपुर के बकावंड ब्लॉक के सरगीगुड़ा गांव में राशन व्यवस्था ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। यहां करीब 200 राशन कार्डधारी परिवारों को हर महीने राशन लेने के लिए 3 से 4 किलोमीटर तक पैदल चलकर मरेठा जाना पड़ता है।

सरगीगुड़ा, मरेठा पंचायत का आश्रित ग्राम है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में राशन मिलने की व्यवस्था पहले थी, लेकिन पंचायत चुनाव के बाद राशन दुकान को मरेठा में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद से ग्रामीणों को हर महीने राशन लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

35 किलो राशन सिर पर रखकर पैदल सफर

सबसे बड़ी समस्या यह है कि मरेठा तक आने-जाने के लिए नियमित बस या ऑटो की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को 35 किलो राशन और अन्य सामान सिर या कंधे पर रखकर 3-4 किलोमीटर पैदल अपने गांव तक लौटना पड़ता है। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह सफर और भी मुश्किल हो जाता है।

बरसात के मौसम में परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। बारिश, कीचड़ और खराब रास्तों के बीच राशन लेकर पैदल आना ग्रामीणों के लिए हर महीने की मजबूरी बन गया है।

पहले गांव में मिलता था राशन, अब बढ़ा संघर्ष

ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत चुनाव से पहले सरगीगुड़ा में ही राशन मिल जाता था। लेकिन चुनाव के बाद राशन दुकान मरेठा में शिफ्ट कर दी गई। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय स्तर पर समस्या उठाई। उन्हें लगातार “आज होगा, कल होगा” का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन व्यवस्था अब तक नहीं बदली।

अब ग्रामीणों ने एकजुट होकर विधायक और कलेक्टर से राशन दुकान को फिर से सरगीगुड़ा में संचालित करने की मांग की है।

सवाल राशन का नहीं, व्यवस्था की पहुंच का है

सरकार गरीब और ग्रामीण परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने के लिए राशन व्यवस्था को कल्याणकारी योजना के तौर पर पेश करती है। लेकिन सवाल यह है कि अगर एक बुजुर्ग या गरीब परिवार को अपने हिस्से का राशन लेने के लिए हर महीने कई किलोमीटर पैदल चलना पड़े, तो सरकारी व्यवस्था की वास्तविक पहुंच कितनी है?

शहरी इलाकों में जहां कुछ ही मिनटों में बाइक, ऑटो या अन्य साधनों से सफर पूरा हो जाता है, वहीं दूरदराज के गांवों में परिवहन की सुविधा नहीं होने के कारण राशन का 35 किलो बोरा ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त बोझ बन जाता है।

सरकार यदि वास्तव में ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर गंभीर है तो मंचों पर आश्वासन देने के बजाय जमीनी स्तर पर पहुंचकर सरगीगुड़ा जैसे गांवों की स्थिति देखनी होगी और राशन दुकान तक ग्रामीणों की आसान पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment