शराब घोटाला: रामगोपाल अग्रवाल से ED की पूछताछ, हाईकमान का जिक्र; BJP नेताओं से कनेक्शन, विधानसभा अध्यक्ष से पारिवारिक संबंध

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच के बीच ED की पूछताछ में कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल से कथित वित्तीय नेटवर्क और राजनीतिक संपर्कों को लेकर कई अहम सवाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के साथ-साथ पार्टी हाईकमान से जुड़े राजनीतिक संपर्कों का भी जिक्र हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच का दायरा प्रदेश कांग्रेस से लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े राजनीतिक संपर्कों तक बढ़ने की चर्चा है। दूसरी ओर, रामगोपाल अग्रवाल के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व कोषाध्यक्ष एवं भाजपा नेता गौरीशंकर अग्रवाल से पारिवारिक रिश्तों का मुद्दा भी चर्चा में है।

जांच एजेंसी अब कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पूछताछ में सामने आए राजनीतिक नामों और संपर्कों का कथित शराब सिंडिकेट, अवैध वसूली या उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पूछताछ में जिन नामों का जिक्र हुआ, उनका कथित शराब घोटाले से कोई आपराधिक संबंध है या नहीं।

भाजपा नेताओं से पारिवारिक रिश्तों का भी जिक्र
मामले में रामगोपाल अग्रवाल के राजनीतिक और पारिवारिक संपर्क भी चर्चा में हैं। उनके परिवार के संबंध भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से होने की बात सामने आती रही है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व कोषाध्यक्ष एवं भाजपा नेता गौरीशंकर अग्रवाल से पारिवारिक रिश्ते का भी उल्लेख किया जा रहा है।

हालांकि, इन पारिवारिक रिश्तों का कथित शराब घोटाले में किसी आपराधिक भूमिका का प्रमाण माना जाना अलग विषय है। केवल पारिवारिक या सामाजिक संबंध अपने आप में किसी व्यक्ति की अपराध में संलिप्तता साबित नहीं करते। इन संबंधों की प्रासंगिकता जांच एजेंसी के सामने उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों पर निर्भर करेगी।

हाईकमान तक पहुंचने वाले तारों की भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, ED की पूछताछ के दौरान रामगोपाल अग्रवाल से राजनीतिक संपर्कों और कथित वित्तीय नेटवर्क को लेकर भी सवाल किए गए। पूछताछ में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के साथ-साथ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी हाईकमान से जुड़े राजनीतिक संपर्कों का भी जिक्र होने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि पूछताछ में सामने आए नामों का कथित शराब सिंडिकेट, अवैध वसूली या उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।

सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारियों के आधार पर आने वाले दिनों में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं तक जांच की आंच पहुंच सकती है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जिन नामों का जिक्र हुआ है, उनका कथित शराब घोटाले में क्या संबंध है और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध हैं या नहीं।

यदि जांच में दस्तावेजी या वित्तीय साक्ष्य सामने आते हैं, तो ED द्वारा पूछताछ का दायरा बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस के प्रदेश स्तर से लेकर हाईकमान स्तर तक राजनीतिक संपर्कों की जांच इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू बन सकती है।

करीब 3000 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई की जांच
ED की जांच में वर्ष 2019 से 2023 के बीच आबकारी व्यवस्था से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन और करीब 3,000 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित सिंडिकेट के जरिए रकम का संग्रह किस स्तर पर हुआ, उसका हिसाब कौन रखता था और कथित तौर पर पैसा किन लोगों तक पहुंचाया जाता था। एजेंसी उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर रही है।

टुटेजा, ढेबर और त्रिपाठी से संबंधों पर पूछताछ
रामगोपाल अग्रवाल से अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और एपी त्रिपाठी के साथ उनके कथित संपर्कों को लेकर भी पूछताछ की जा रही है। जांच का एक अहम पहलू यह है कि इन लोगों के बीच किस तरह का संपर्क था और कथित शराब सिंडिकेट की गतिविधियों से उनका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।

डिस्टिलर्स से कमीशन और लाइसेंस से जुड़े आरोप
ED के आरोपों के मुताबिक, कथित शराब घोटाले में डिस्टिलर्स से कमीशन वसूली, बिना हिसाब वाली देसी शराब की बिक्री और FL-10A लाइसेंस से जुड़े कथित लेनदेन जैसे पहलुओं की जांच की गई है।
एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर लोगों की भूमिकाएं निर्धारित थीं और कथित तौर पर अवैध रकम की वसूली से लेकर उसके हिसाब-किताब और आगे पहुंचाने तक की व्यवस्था थी।

डिजिटल और हस्तलिखित रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान सामने आए कथित डिजिटल और हस्तलिखित रिकॉर्ड भी ED की पड़ताल का हिस्सा हैं। इनमें तारीखों, कोड वर्ड, नाम और रकम से संबंधित प्रविष्टियां होने का दावा किया गया है।

एजेंसी इन रिकॉर्ड के आधार पर कथित पैसों के प्रवाह की कड़ियों को जोड़ने और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किन लोगों तक पहुंची।

18 अगस्त को कोर्ट में पेशी
पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रामगोपाल अग्रवाल को 18 अगस्त को अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई है। इसके बाद जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों और पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारियों का आगे परीक्षण किया जाएगा।

कथित शराब घोटाले की जांच में अब फोकस केवल पैसों के लेनदेन तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक संपर्क, कारोबारी नेटवर्क, कथित सिंडिकेट की संरचना और रकम के अंतिम लाभार्थियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

नोट:शराब घोटाले से जुड़े सभी आरोप जांच एजेंसियों के दावे/आरोप हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक संबंधित व्यक्तियों को कानूनन निर्दोष माना जाता है।

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