नई दिल्ली। कांग्रेस की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने मोदी सरकार की VB-G RAM G योजना को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नई योजना का पहला महीना ही ग्रामीण रोजगार के मोर्चे पर चिंता बढ़ाने वाला है। नटराजन के मुताबिक, जुलाई 2026 में ग्रामीण रोजगार सृजन में जुलाई 2025 की तुलना में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है।
उन्होंने दावा किया कि नए कानून के लागू होने के बाद जुलाई 2026 में काम के कार्य-दिवस में 49.94 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि रोजगार पाने वाले परिवारों की संख्या 51.45 प्रतिशत घट गई। उनके अनुसार, सृजित रोजगार के कार्य-दिवस में भी करीब 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
नटराजन ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष ने पहले ही आशंका जताई थी कि मोदी सरकार द्वारा MGNREGA को खत्म कर नई व्यवस्था लागू करने का असर ग्रामीण मजदूरों पर पड़ेगा। अब पहले महीने के आंकड़े उसी चिंता को सही साबित करते दिखाई दे रहे हैं।
MGNREGA और VB-G RAM G में अंतर का दावा
पूर्व सांसद ने कहा कि MGNREGA के तहत ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की कानूनी गारंटी मिली हुई थी और ग्राम पंचायतों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसका उद्देश्य मजदूरों को सरकार की इच्छा या राजनीतिक फैसलों पर निर्भर रहने के बजाय रोजगार का अधिकार देना था।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके विपरीत VB-G RAM G को अधिक केंद्रीकृत बनाया गया है। राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ बढ़ा है और रोजगार तक पहुंच के लिए तकनीक व बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पर ज्यादा निर्भरता बढ़ गई है।
नटराजन का कहना है कि नई व्यवस्था में रोजगार की गारंटी को कमजोर किया गया है, जिससे ग्रामीण मजदूरों के लिए अपने अधिकारों का दावा करना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है।
‘सीधे-सीधे रोजगार चोरी’
मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि उनके परिवार की रोजी-रोटी का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर रही है।
उन्होंने VB-G RAM G को “सीधे-सीधे रोजगार चोरी” करार देते हुए कहा कि सरकार को ग्रामीण मजदूरों के हित में रोजगार की गारंटी और उनकी पहुंच को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।





