बिलासपुर।छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से अंधविश्वास का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक आरोपी को जमानत दिलाने के लिए चार लोगों ने श्मशान घाट में कथित तौर पर तांत्रिक अनुष्ठान शुरू कर दिया। इस पूजा में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और दो अन्य लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
मामला सीपत थाना क्षेत्र के देवरी गांव स्थित मुक्तिधाम का है। शुक्रवार देर रात चार युवक श्मशान घाट में संदिग्ध गतिविधियां करते दिखाई दिए। ग्रामीणों ने काफी देर तक उन पर नजर रखी और फिर उन्हें घेरने की कोशिश की। युवकों ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों ने ऋषिकेश कुमार नाम के एक युवक को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। उसके तीन साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल से चीफ जस्टिस और दो अन्य लोगों की तस्वीरें बरामद कीं। इसके अलावा वहां से मरी हुई मछली, सिंदूर, नींबू, नारियल और कथित तांत्रिक पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री भी मिली।
जमानत के लिए तांत्रिक के बहकावे में आए
पुलिस की पूछताछ में पकड़े गए ऋषिकेश ने बताया कि उसका रिश्तेदार प्रियांशु बोले चाकूबाजी के एक मामले में जेल में बंद है और उसकी जमानत अर्जी अदालत में लंबित है।
इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए उनकी मुलाकात एक कथित तांत्रिक से हुई। तांत्रिक ने दावा किया कि श्मशान घाट में विशेष पूजा करने से अदालत से जमानत आसानी से मिल जाएगी। इसी बात पर भरोसा कर चारों युवक कथित तौर पर तांत्रिक अनुष्ठान करने के लिए श्मशान घाट पहुंचे थे।
तीन आरोपियों की तलाश जारी
बिलासपुर पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपी से पूछताछ की जा रही है। वहीं फरार तीन अन्य लोगों की तलाश में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि चीफ जस्टिस और अन्य लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया था। एसपी ने लोगों से अपील की है कि जमानत या किसी भी कानूनी मामले का फैसला केवल अदालत की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होता है। लोगों को ऐसे कथित तांत्रिकों और अंधविश्वास के झांसे में आने से बचना चाहिए।





