रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब आरोप सिर्फ बढ़े हुए बिजली बिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई उपभोक्ता यह दावा भी कर रहे हैं कि उन्हें 200 यूनिट तक बिजली खर्च करने के बावजूद कई महीनों से ‘हाफ बिजली योजना’ के तहत मिलने वाली रियायत नहीं मिली। इससे सवाल उठने लगे हैं कि क्या स्मार्ट मीटर के साथ-साथ सरकार ने बिजली बिल में मिलने वाली छूट पर भी चुपचाप सेंध लगा दी है?
उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले हर महीने मिलने वाली रियायत अब कई मामलों में गायब दिखाई दे रही है। ऐसे में लोगों से अपने पिछले दो वर्षों के बिजली बिल निकालकर यह जांचने की अपील की जा रही है कि कहीं उन्हें भी पात्र होने के बावजूद ‘हाफ बिजली योजना’ का लाभ तो नहीं रोका गया।

विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार में स्मार्ट मीटर आम लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गए हैं। पहले बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतें सामने आईं और अब बिजली बिल में मिलने वाली छूट को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि पात्र उपभोक्ताओं को योजना का लाभ नहीं मिला है तो सरकार को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो मामला केवल स्मार्ट मीटर का नहीं रहेगा, बल्कि उन लाखों उपभोक्ताओं के अधिकारों का होगा जिन्हें सरकार की घोषित योजना का लाभ मिलना चाहिए था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिजली बिल में मिलने वाली रियायत किसके आदेश पर और किन कारणों से रोकी गई?





