छत्तीसगढ़ में वर्षों से ठप पड़े भारतनेट (BharatNet) प्रोजेक्ट का मुद्दा सोमवार को लोकसभा में गूंजा। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने नियम-377 के तहत यह मामला उठाते हुए केंद्र सरकार से परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निगरानी समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ के लिए ₹3,942 करोड़ की स्वीकृति दी है, इसलिए पुराने कार्यों की समीक्षा और नए फंड के पारदर्शी उपयोग की निगरानी जरूरी है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में कहा कि भारतनेट योजना का उद्देश्य ग्रामीण भारत को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ना है, लेकिन छत्तीसगढ़ के करीब 20 हजार गांव आज भी इस सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 4,114 ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) पहुंचाई गई थी, लेकिन इनमें से 3,519 कनेक्शन वर्तमान में बंद पड़े हैं और केवल 595 ही संचालित हैं।

उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में ₹1,754 करोड़ की लागत से 5,540 ग्राम पंचायतों में OFC बिछाई गई, लेकिन वर्तमान में एक भी ग्राम पंचायत में यह नेटवर्क चालू नहीं है। उनके अनुसार, यह स्थिति मुख्य रूप से चिप्स छत्तीसगढ़ और परियोजना का कार्य कर रही एजेंसी टाटा प्रोजेक्ट्स के बीच बिल भुगतान विवाद के कारण बनी हुई है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘डिजिटल इंडिया’ परिकल्पना को साकार करने के लिए भारतनेट परियोजना की सफलता बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गांवों को डिजिटल सेवाओं, ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ने के लिए परियोजना को शीघ्र शुरू किया जाना चाहिए।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि भारतनेट परियोजना के पुराने कार्यों की समीक्षा, तकनीकी कमियों का समाधान और ₹3,942 करोड़ के नए आवंटन के प्रभावी उपयोग के लिए एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति का गठन किया जाए, ताकि परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी हो और ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट सुविधा पहुंच सके।
भारतनेट योजना के तहत ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए बीएसएनएल की विशेष ग्रामीण योजना भी उपलब्ध है, जिसमें मात्र ₹259 प्रति माह में इंटरनेट सुविधा देने का प्रावधान है। हालांकि, परियोजना ठप होने के कारण प्रदेश के लाखों ग्रामीण इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं |





