केंद्र सरकार ने 16 जुलाई 2026 से पेट्रोल, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) पर लगने वाले निर्यात शुल्क (Export Duty) में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने जहां पेट्रोल पर निर्यात शुल्क कम किया है, वहीं डीजल और ATF पर टैक्स में भारी बढ़ोतरी की है। नई दरें गुरुवार से लागू हो गई हैं। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों की समीक्षा हर 15 दिन में करती है और उसी के आधार पर निर्यात शुल्क तय किया जाता है।
नई अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी इसमें 1.50 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। वहीं डीजल पर निर्यात शुल्क 8.50 रुपये से बढ़ाकर 15.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, यानी 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) पर भी शुल्क 7.50 रुपये से बढ़ाकर 14.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जिसमें भी 7 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। गुरुवार सुबह WTI क्रूड करीब 80.13 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 85.39 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। ईरान पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दे चुका है, जबकि अमेरिका भी कड़े कदम उठाने के संकेत दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है, जहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यदि यहां किसी प्रकार की बाधा आती है तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में और तेजी आ सकती है।
हालांकि, सरकार द्वारा किया गया यह बदलाव निर्यात शुल्क में है, इसलिए इसका सीधा असर आम लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों पर फिलहाल नहीं पड़ेगा। लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में घरेलू ईंधन कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने जून में व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए रिटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर अस्थायी रोक लगाई थी, जिसे 1 जुलाई को हटा लिया गया था। अब एक बार फिर वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार ने निर्यात शुल्क में बदलाव कर ईंधन बाजार पर नजर बनाए रखने का संकेत दिया है।






