रायपुर। सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल 2026 को हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट मामले में छत्तीसगढ़ विधानसभा में सरकार के लिखित जवाब ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। विधानसभा में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन द्वारा दिए गए उत्तर में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम दुर्घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों में शामिल नहीं है। जबकि हादसे के बाद दर्ज एफआईआर में उनके नाम को लेकर लगातार खबरें सामने आती रही थीं।
14 अप्रैल 2026 को हुए इस हादसे में पहले 20 मजदूरों की मौत हुई थी, बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 25 हो गई। वहीं 16 मजदूर घायल हुए थे। घटना के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए थे और कहा था कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ श्रम कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार पुलिस ने प्रबंधन की प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेंद्र कुमार पटेल समेत 19 लोगों के खिलाफ लापरवाही से मौत की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि एफआईआर सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि किन लोगों के खिलाफ किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाया नहीं जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के चालू सत्र में विधायक बालेश्वर साहू ने इस दुर्घटना से जुड़े प्रश्न पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि औद्योगिक दुर्घटना के मुख्य दोषी कौन हैं, उनके नाम-पते क्या हैं तथा 15 जून 2026 तक उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है।
मंत्री लखन लाल देवांगन ने अपने लिखित उत्तर में कहा कि कारखाना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के अनुसार दुर्घटना के लिए कारखाने का अधिभोगी और कारखाना प्रबंधक जिम्मेदार होते हैं। सरकार ने कारखाने के अधिभोगी के रूप में अरुण मिश्रा तथा कारखाना प्रबंधक के रूप में देवेन्द्र कुमार पटेल का नाम दर्ज किया है। जवाब में बताया गया है कि दुर्घटना की जांच में कारखाना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के उल्लंघन पाए जाने पर दोनों के विरुद्ध 27 जून 2026 को श्रम न्यायालय, जांजगीर में अभियोजन दायर किया गया है, जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
विधानसभा में दिए गए इस आधिकारिक जवाब में न तो अनिल अग्रवाल का नाम दुर्घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों में शामिल है और न ही उनके खिलाफ श्रम न्यायालय में किसी अभियोजन का उल्लेख किया गया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि यदि प्रारंभिक स्तर पर एफआईआर में उनके नाम शामिल होने की खबरें थीं, तो विधानसभा में सरकार के जवाब में उनका उल्लेख क्यों नहीं है। हालांकि पुलिस की आपराधिक जांच और श्रम विभाग की वैधानिक कार्रवाई अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, लेकिन सरकार के लिखित उत्तर ने इस मामले को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।





