वृंदा करात का आरोप: “क्या बजरंग दल और RSS को कानून तोड़ने की छूट है?”

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में कथित धर्मांतरण और मानव तस्करी के मामले में दो ननों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। यह मामला अब न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि संसद तक चर्चा का विषय बन चुका है। इस मुद्दे को लेकर कई राजनीतिक दलों ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

मुख्य विषय:

सीपीआई (एम) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि क्या छत्तीसगढ़ में बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को कानून हाथ में लेने की छूट है? उन्होंने कहा कि इन संगठनों द्वारा हिंसा और कानून उल्लंघन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती।

घटना की पृष्ठभूमि:

दुर्ग में दो ननों को कथित रूप से जबरन धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस पर वामपंथी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। वृंदा करात के नेतृत्व में केरल से आए लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के सांसदों और प्रतिनिधियों ने दुर्ग जेल का दौरा कर दोनों ननों से मुलाकात की और प्रशासन से इस मामले में जवाब मांगा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया:

इस घटना को लेकर संसद में भी विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर उनके खिलाफ झूठे केस दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई हो रही है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment