गरियाबंद जिले में आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सरकारी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। कहीं निर्माण एजेंसियों ने अग्रिम भुगतान लेने के बाद काम छोड़ दिया तो कहीं स्वीकृत पदों से दोगुने कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी गई। अब जिला प्रशासन इन मामलों में रिकवरी और जांच की कार्रवाई कर रहा है।
स्कूल जतन योजना में 2.88 करोड़ की रिकवरी की तैयारी
स्कूल जतन योजना के तहत कई स्कूलों के निर्माण और मरम्मत कार्य समय पर पूरे नहीं हो सके। विभाग ने निर्माण एजेंसियों को अग्रिम भुगतान कर दिया था, लेकिन तय अवधि में कार्य पूरा नहीं होने पर अब करीब 2.88 करोड़ रुपये की रिकवरी की तैयारी की जा रही है। संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
शौचालय निर्माण में भी भारी लापरवाही
116 स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण एजेंसी को बड़ी राशि अग्रिम देने के बावजूद करीब 10 महीने में केवल 23 शौचालय ही बन पाए। प्रशासन ने अधूरे कार्यों पर आपत्ति जताते हुए भुगतान की गई राशि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
स्वीकृत 255 पद, नियुक्ति 513 कर्मचारियों की
आश्रम-शालाओं में स्वीकृत 255 पदों के मुकाबले 513 कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी गई। अतिरिक्त नियुक्तियों के कारण विभाग पर आर्थिक बोझ बढ़ा और शासन से पर्याप्त बजट नहीं मिलने के चलते कर्मचारियों का करीब 3.84 करोड़ रुपये वेतन लंबित हो गया। सेवाएं समाप्त होने के बाद भी अतिरिक्त कर्मचारी भुगतान की मांग कर रहे हैं।
जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों से जवाब तलब किया है। अनियमितताओं की जांच के साथ-साथ सरकारी राशि की वसूली की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।





