रायपुर।छत्तीसगढ़िया समाज पार्टी (छसपा), छबेस, किसान मोर्चा एवं सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज की संयुक्त बैठक रविवार को छत्तीसगढ़ी भवन में आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार पर शासकीय, आदिवासी एवं वन भूमि से जुड़े मामलों में गंभीर आरोप लगाए गए। बैठक में उपस्थित नेताओं ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग भी की।
बैठक में छसपा के प्रदेश अध्यक्ष अनिल दुबे ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में कथित रूप से लगभग 55 लाख एकड़ शासकीय, आदिवासी और वन भूमि को कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से बेचा गया तथा उन जमीनों पर उद्योग स्थापित कर अवैध रूप से खनिज संपदा का दोहन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में साय सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
अनिल दुबे ने आरोप लगाया कि कुछ मंत्री और विधायक उद्योगों में ठेकेदारी की लड़ाई लड़ रहे हैं तथा भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को उनकी जमीन और अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जबकि कथित रूप से भूमि बेचकर कुछ लोग मालामाल हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते छत्तीसगढ़ियों के अधिकारों की रक्षा नहीं की गई तो प्रदेश में अभूतपूर्व जनक्रांति की स्थिति बन सकती है। उनका आरोप था कि शोषित समाज अब शोषण के खिलाफ संघर्ष का मन बना चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीति के सभी दलों में ऐसे लोग सक्रिय हैं, जिनका उद्देश्य लोकतंत्र का दुरुपयोग कर निजी लाभ कमाना है।
बैठक में ग्राम नकटी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। अनिल दुबे ने आरोप लगाया कि ग्राम नकटी में छत्तीसगढ़ियों के कब्जे वाली भूमि पर आधी रात को बुलडोजर चलाकर गरीब परिवारों को बारिश के मौसम में बेघर कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि बाहर से आए कथित शोषकों और भू-माफियाओं के खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं होती। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने तथा राज्य सरकार से जवाब देने की मांग की।
बैठक की शुरुआत छत्तीसगढ़ की महान पंडवानी गायिका तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ को केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पहचान दिलाई। उनके रायपुर एम्स में निधन को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की अपूरणीय क्षति बताया गया। लोक कलाकार लक्ष्मी नारायण निषाद ने शोकसभा को संबोधित करते हुए तीजन बाई के योगदान को याद किया।

बैठक में दाऊ जी.पी. चंद्राकर, अनिल दुबे, लालाराम वर्मा, बृज बिहारी साहू, श्यामू राम सेन, लक्ष्मी नारायण निषाद, विमल ताम्रकार, चेतन देवांगन, अशोक कश्यप, अंकित साहू, रूप सिंह निषाद सहित बड़ी संख्या में किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने तीजन बाई को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए प्रदेश के भूमि और किसान हितों से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।





