रायपुर। नया रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) भ्रष्टाचार, जमीन घोटाले और करोड़ों रुपए के बंदरबांट के मामले में पूरी तरह घिर चुका है। NRDA के कार्य परियोजना को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे है। आरोप लग रहे है कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे को लाभ पहुंचाने के लिए NRDA के दो मुख्य अभियंता द्वारा बिना किसी महत्व और औचित्य का परियोजना कार्य के लिए टेंडर निकाला गया है।
जानकारी के अनुसार NRDA ने रायपुर और नया रायपुर के बीच टाउनशिप डेवलपमेंट के लिए टेंडर निकाला था जिसमें निर्माण एजेंसियों को टाउनशिप डेवलपमेंट के बदले 200 एकड़ जमीन देने की बात कही गई और जिसका मूल्य लगभग 6000 करोड़ का बताया गया। जिस डेवलपमेंट का न ही कोई महत्व है और न ही कोई औचित्य इसके बदले इतना जमीन देना सीधा राज्य सरकार के खजाना और जनता के पैसों की खुली लूट है।
आरोप लग रहे है कि NRDA के दो मुख्य अभियंता द्वारा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे को लाभ पहुंचाने के लिए यह परियोजना कार्य जारी किया गया। NRDA के इन मुख्य अभियंता और उनके चहेते ठेकेदारों की मिलीभगत से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे को हजारों करोड़ों का फायदा पहुंचाने की तैयारी चल रही है।
सूत्रों के अनुसार इससे पहले भारतमाला घोटाले में भी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का बेटा शामिल था परंतु प्रभावशील होने के कारण उसपर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
छत्तीसगढ़ अब भ्रष्टाचार का गढ़ बन चुका है जहां हर विभाग में कहीं न कहीं भ्रष्ट अधिकारी जनता के पैसों की बर्बादी करने और अपना अपना जेब भरने में लगे हुए है। किसी को मंत्री का संरक्षण प्राप्त होने के कारण उसपर कोई कार्रवाई नहीं की जाती तो किसी को कोई बड़े नेता के बेटा होने के कारण।
NRDA जिसका काम डेवलपमेंट कार्य करना है वह विभाग पूरी तरह से घोटालेबाजों और भ्रष्ट अधिकारियों से भर चुका है। अब सवाल यही है कि क्या NRDA के इस परियोजना कार्य पर सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी या पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे का जेब ऐसे ही भरता रहेगा?




