नई दिल्ली/रायपुर।रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल मंगलवार को नई दिल्ली में संसद की प्राक्कलन समिति (एस्टीमेट कमेटी) की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए। बैठक में देश में भारी उपकरणों के उत्पादन की क्षमता और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र को मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई।
बैठक में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के लक्ष्य को पूरा करने में भारी इंजीनियरिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टर की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए इस क्षेत्र को और मजबूत करना जरूरी है।
भारी उपकरणों के उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी
अग्रवाल ने बैठक में सामने आए आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारी उपकरणों के उत्पादन और निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है। अर्थमूविंग, निर्माण और खनन मशीनरी का उत्पादन 2020-21 में 29,021 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 80,750 करोड़ रुपये हो गया। यानी इसमें करीब 178.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
इसी तरह इस क्षेत्र के निर्यात में भी 274.4 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। मशीन टूल्स और डाई-मोल्ड सेक्टर का उत्पादन भी 6,602 करोड़ रुपये से बढ़कर 14,286 करोड़ रुपये हो गया है।

भारी विद्युत उपकरणों जैसे ट्रांसफॉर्मर, बॉयलर और टर्बाइन के उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही इन क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता में करीब 19.6 प्रतिशत की कमी आई है।
स्वदेशी तकनीक पर जोर
सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार की कैपिटल गुड्स सेक्टर से जुड़ी योजनाओं के तहत IIT, IISc, CMTI, ARAI और BHEL जैसे संस्थानों के सहयोग से रिसर्च सेंटर और कॉमन इंजीनियरिंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इन प्रयासों से 25 से ज्यादा नई स्वदेशी तकनीकें विकसित और व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाई जा चुकी हैं। इसके अलावा 70 से ज्यादा IPR भी दाखिल किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ में बन सकता है भारी मशीनरी का हब
बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास का मुद्दा भी बैठक में उठाया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, ऊर्जा, खनन और इस्पात उत्पादन के लिहाज से देश के प्रमुख राज्यों में है। ऐसे में यहां भारी मशीनरी और खनन उपकरणों के निर्माण तथा उनके मेंटेनेंस का बड़ा हब विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने स्थानीय युवाओं के लिए आधुनिक तकनीक और इंडस्ट्री 4.0 की जरूरतों के अनुसार उच्चस्तरीय स्किल ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और राज्य के औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।
बृजमोहन अग्रवाल ने विश्वास जताया कि प्राक्कलन समिति की ओर से तैयार किए जाने वाले सुझाव भारत को भारी उपकरण निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों की कतार में खड़ा करने में मदद करेंगे।






