रायपुर के नकटी गांव में प्रशासन द्वारा तोड़े गए घरों और वहां प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की मार्मिक अपील का त्वरित असर दिखा। बिंद्रानवागढ़ के जनक राम ध्रुव, सराईपाली की चातुरी नंद, बिलाईगढ़ की कविता प्राण लहरे और लैलूंगा की विद्यावती सिदार ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर साफ कहा है — हम नकटी में बने कॉलोनी के आवास स्वीकार नहीं करेंगे। “हमें गरीबों की आह नहीं लेनी है,” पत्र में स्पष्ट लिखा गया है।


घटना का मंजर भयावह: प्रशासन ने सोमवार तड़के बिना विस्तृत रिपोर्ट और पुनर्वास व्यवस्था के 80 घर तोड़ दिए। प्रभावित परिवारों के सामने अब खुले आसमान के नीचे जीने का सवाल है। ग्रामीणों ने कहा कि वे मर जाएंगे पर गांव नहीं छोड़ेंगे। कई मकानों का निर्माण प्रधानमंत्री आवास और इंदिरा आवास योजनांतर्गत किया गया था,
फिर भी उनके घरों को निशाना बनाया गया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नकटी की जमीन पर आईएएस‑आईपीएस‑आईएफएस अधिकारियों और विधायकों के लिए 66 एकड़ में कॉलोनी का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है और चारागाह की 10 एकड़ जमीन से 35–40 वर्षों से बसे ग्रामीणों को हटाया जा रहा है।
स्थानीयों का दावा है कि कई प्रभावशाली (बीजेपी से जुड़े) लोगों की जमीन है, किन्तु कार्रवाई गरीबों के मकानों पर ही की गई। आरोप है कि यह जमीन मूल्य बढ़ाने के लिए, और एनआरडीए‑प्रोजेक्ट को प्रमोट करने के लिए कराया गया सामरिक सफाया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रभावित परिवारों से मिले, टूटे घरों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों की पीड़ा को मैदान पर सुना। बैज ने प्रशासन पर कहा: गरीबों के घर उजाड़ना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं। उन्होंने कार्रवाई की निंदा करते हुए पूरा मुआवजा और आजीविका के नुकसान की भरपाई की मांग की है।
बैज ने आश्वस्त किया कि कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक यह लड़ाई लड़ेगी; जल्द प्रतिनिधि मंडल राज्यपाल से मिलेगा और मानसून सत्र में यह मुद्दा उठाया जाएगा। “घर टूटे तो क्या हुआ, घर दोबारा बनेगा — कांग्रेस आपके साथ है,” बैज ने पत्रकारों से कहा।
स्थानीय लोगों और विपक्ष के दबाव के बीच अब प्रशासन और सरकार पर सवाल उठे हैं — क्या बिना पारदर्शी जांच और पुनर्वास योजना के उठाया गया यह कदम कानूनी और नीतिगत रूप से सही था? विरोध के तेज होने पर परियोजना की जगह और वैकल्पिक भूमि आवंटन जैसे रास्ते अब सुने जाने लगे हैं: कांग्रेस विधायकों ने मांग की है कि नकटी की जगह नया रायपुर या कोई अन्य केंद्रीय स्थान सुझाया जाए।
स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रभावित परिवारों को राहत और पुनर्वास की तत्काल व्यवस्था, प्रभावितों के मुआवजे का आश्वासन और परियोजना की पारदर्शी छानबीन की मांग अब सियासी एवं सामाजिक दोनों ही स्तरों पर तेज हो गई है। प्रशासन की अगली हरकत पर ही आगे का पटल साफ होगा।




