महाराष्ट्र के नवी मुंबई में दो साल की बच्ची की पिटाई का वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो के वायरल होने के बाद दावा किया गया कि बच्ची के साथ मारपीट करने वाली महिला सरकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है। हालांकि पुलिस जांच में यह दावा पूरी तरह गलत साबित हुआ।
पनवेल सिटी पुलिस के अनुसार, बच्ची के साथ मारपीट करने वाली महिला कोई आंगनवाड़ी कर्मचारी नहीं, बल्कि उसकी अपनी मां है। जांच में सामने आया कि बच्ची के बार-बार इधर-उधर घूमने और शांत होकर नहीं बैठने से नाराज होकर मां ने गुस्से में उसकी पिटाई कर दी। घटना के दौरान मौजूद एक व्यक्ति ने इसका वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया। जांच में बच्ची के शरीर पर कोई गंभीर या अंदरूनी चोट नहीं पाई गई। इसके बाद पुलिस ने बच्ची के माता-पिता को थाने बुलाकर पूछताछ की और काउंसलिंग करते हुए भविष्य में बच्चे के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट या दुर्व्यवहार नहीं करने की सख्त चेतावनी दी। फिलहाल मामले में कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया है।
इस मामले पर महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि वीडियो सामने आने के तुरंत बाद विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे। जांच में स्पष्ट हुआ कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली महिला आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नहीं है।
मंत्री ने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या जानकारी को बिना पुष्टि के साझा न करें। उन्होंने कहा कि राज्य की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लाखों बच्चों और माताओं की सेवा पूरी निष्ठा से कर रही हैं। ऐसे में तथ्यों की पुष्टि किए बिना उन पर आरोप लगाना उचित नहीं है।
पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी नागरिकों से अपील की है कि किसी भी वायरल वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।





