बिलासपुर में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। हालात ऐसे दिखाई दे रहे हैं कि अब कानून का पालन कराने वाले पुलिसकर्मी भी बदमाशों के निशाने पर हैं। शहर में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर बदमाशों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? जब ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का भरोसा किस आधार पर किया जाए?
ताजा मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र के कुदुदंड का है। जानकारी के अनुसार, डायल-112 में पदस्थ आरक्षक मोरज सिंह (बैच नंबर 788) अपनी टीम के साथ घरेलू विवाद की सूचना पर मौके पर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि सागर छात्रवानी अपने पिता मुन्ना छात्रवानी के साथ गाली-गलौज और मारपीट कर रहा था। सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और विवाद को शांत कराने का प्रयास किया।
पुलिस टीम ने बीच-बचाव कर उसके पिता को सुरक्षित करने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान शराब के नशे में धुत सागर छात्रवानी की पुलिसकर्मियों से बहस हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि उसने अपने पास मौजूद डंडे से आरक्षक मोरज सिंह पर हमला कर दिया। हमले में आरक्षक के सिर और आंख में गंभीर चोटें आईं।
घायल आरक्षक को तत्काल उपचार के लिए सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आरोपी की घेराबंदी कर उसे हिरासत में ले लिया और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस घटना ने शहर की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों के बीच चर्चा है कि यदि पुलिसकर्मी ही अपराधियों के हमले से सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या हाल होगा। विपक्ष पहले से ही प्रदेश में बढ़ते अपराधों को लेकर सरकार पर निशाना साधता रहा है। ऐसे में डायल-112 के आरक्षक पर हमला प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार के संरक्षण में गुंडाराज चल रहा है” या “पुलिस की चुप्पी का कारण नेता हैं





