बिलासपुर। बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए एक शिक्षक ने अपने तबादले की मांग को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया। खास बात यह रही कि उन्होंने किसी वकील की मदद लेने के बजाय अदालत में खुद ही अपना पक्ष रखा। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को उनके आवेदन पर 45 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मरकेली हाई स्कूल में पदस्थ व्याख्याता गया राम दुबे ने कोर्ट को बताया कि उनके बच्चे भिलाई में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार में उनकी देखभाल करने वाला कोई दूसरा सदस्य नहीं है, जिसके कारण उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी वर्तमान पदस्थापना और भिलाई के बीच करीब 150 किलोमीटर की दूरी है।
याचिका में उन्होंने बताया कि जून 2025 में उनका तबादला बालोद जिले के कुमुदकट्टा से मरकेली किया गया था। लगभग एक साल सेवा देने के बाद उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को दुर्ग संभाग के संयुक्त संचालक, स्कूल शिक्षा को आवेदन देकर बालोद या दुर्ग जिले में स्थानांतरण की मांग की थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से भी आवेदन पर निर्णय लेने के अनुरोध का विरोध नहीं किया गया। मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने कहा कि किसी कर्मचारी के आवेदन को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। इसके बाद अदालत ने संयुक्त संचालक, स्कूल शिक्षा को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर कानून के अनुसार 45 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया।





