छत्तीसगढ़ के किसानों को इस साल धान की अच्छी फसल होने की उम्मीद थी, लेकिन उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं. राज्य के अलग-अलग इलाकों में, खासकर रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है. जंगली हाथियों का झुंड खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे किसान आर्थिक संकट में घिरते जा रहे हैं.
फसल बर्बाद, आजीविका संकट में
रायगढ़ के धरमजयगढ़ इलाके में, सिंघिझाप के जंगल से आए 17 हाथियों के एक झुंड ने शनिराम की पूरी फसल नष्ट कर दी. शनिराम की तरह ही गेरसा, बरतापाली और आमगांव के कई किसान भी इस महीने हाथियों के हमले का शिकार हुए हैं. इन हमलों से किसानों की सारी मेहनत पर पानी फिर गया है. किसानों का कहना है कि अभी धान की रोपाई भी पूरी नहीं हुई है और हाथियों द्वारा नुकसान पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो चुका है.

धरमजयगढ़ के किसान जयदीप राठिया कहते हैं, “एक बार हाथियों से जान बच भी जाएगी, लेकिन हाथी जिस तरह से फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उससे तो भूखों मरने की नौबत आ सकती है.” उनकी यह बात इस समस्या की गंभीरता को बताती है.
मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरा
छत्तीसगढ़ सरकार ने धान की खरीद के लिए प्रति एकड़ 3,100 रुपए की दर तय की है, जिससे एक किसान को 21 क्विंटल धान पर 65,100 रुपए मिल सकते हैं. लेकिन, दूसरी ओर, वन विभाग वन्यजीवों द्वारा फसलों को पहुंचाए गए नुकसान के लिए प्रति एकड़ अधिकतम सिर्फ 9,000 रुपए का ही मुआवजा देता है. यह मुआवजा किसानों को हुए नुकसान की तुलना में बहुत कम है.
पिछले पांच सालों में, छत्तीसगढ़ में हर साल औसतन 14,690 मामले हाथियों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने के दर्ज किए गए हैं, जिसका मतलब है कि हर दिन कम से कम 40 जगहों पर फसलें बर्बाद हुई हैं. इन आंकड़ों से यह साफ है कि यह समस्या कितनी बड़ी है.
क्या है समाधान?
वन्यजीवों से होने वाले नुकसान को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान करना होगा. यह एक ऐसा कदम हो सकता है, जिससे किसानों को इस समस्या से कुछ राहत मिल सके. फिलहाल, किसान डर के साए में जी रहे हैं, क्योंकि अकेले धरमजयगढ़ वन मंडल में 139 हाथी मौजूद हैं जो लगातार फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ लोगों की जान भी ले रहे हैं. इसी महीने 22 जुलाई को इसी इलाके में हाथियों ने तीन लोगों को मार डाला था.
क्या राज्य सरकार इस समस्या से निपटने के लिए जल्द कोई ठोस कदम उठाएगी? यह सवाल किसानों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है.







