सरकारी गाड़ी, निजी रंगरलियां और विश्वविद्यालय का पैसा! कुलसचिव पर गंभीर सवाल

Madhya Bharat Desk
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दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप का नया कारनामा सामने आया है। उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन ने उपयोग के लिए कार Etios नंबर CG 02 6681 प्रदान की हुई है। सूत्रों के अनुसार उनके व्यक्तिगत झगड़े और मारपीट में सरकारी कार में तोड़फोड़ हुई थी।

कुलसचिव ने उनके व्यक्तिगत झगड़े में टूटी कार को बनवाने के लिए विश्वविद्यालय के वाहन प्रकोष्ठ के जरिए नोटशीट चलवाई और बताया कि दुर्ग के रायपुर नाका स्थित वाई ब्रिज में गति अवरोधक पर ड्राइवर ने ब्रेक लगाया तभी पीछे से आ रही एक अन्य कार ने कुलसचिव की कार को ठोकर मार दी।

कुलपति के समक्ष जब नोटशीट और फाइल आई तो कुलपति ने दुर्घटना की एफआईआर कराने और बीमा क्लेम करने को लिखा। लेकिन कुलसचिव ने सरकारी कार की दुर्घटना की एफआईआर ही नहीं करवाई। कुलपति की टीप के बावजूद न तो एफआईआर करवाई और न ही बीमा क्लेम किया।

सूत्रों के अनुसार कुलसचिव ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वाहन प्रकोष्ठ के जरिए कार की मरम्मत करवाने के बजाय स्वयं ही कार बनवा ली और बिल प्रस्तुत कर, कुलपति की अनुमति लिए बिना ही कार की मरम्मत का खर्च 24,000 रुपये विश्वविद्यालय के खाते से निकाल लिए।

कुलपति ने अब वित्त विभाग से बिना प्रशासकीय स्वीकृति के कुलसचिव द्वारा 24,000 रुपये आहरण किए जाने की जानकारी मांगी है।

दुर्घटनाग्रस्त कार के सारे कांच टूटे हुए थे, जिसको देखकर दूसरी कार द्वारा पीछे से ठोकर मारने की बात गलत लग रही थी। सूत्रों ने बताया कि घटना 17 फरवरी 2026 की है। इस दिन कुलसचिव होटल मैरियट में आयोजित शिक्षा संवाद में शामिल होने रायपुर गए हुए थे। कार्यक्रम के बाद शाम सात बजे जब भूपेंद्र रायपुर से रवाना हुए तो भिलाई में अपनी एक महिला मित्र और प्रेयसी के घर रुके थे। उनकी महिला मित्र भिलाई के ही एक निजी महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं।

थोड़ी देर में उनके महिला मित्र के पति अचानक वहां पहुंच गए और गलत अवस्था में कुलसचिव को देखा। उन्होंने अपने कुछ दोस्तों को भी बुला लिया। महिला मित्र के पति और उनके दोस्तों ने कुलसचिव को पीटा, किसी तरह कुलसचिव वहां से अपने कपड़े लेकर भागे। पति और उनके दोस्तों ने अपनी कार से कुलसचिव का पीछा किया। कुलसचिव और ड्राइवर वाई ब्रिज के नीचे कार को लावारिस छोड़कर विश्वविद्यालय कार्यालय में छुप गए।

कुलसचिव को न पाकर महिला के पति और उसके दोस्तों ने सारा गुस्सा सरकारी कार पर उतारा और लाठी-डंडे और रॉड से कार में जमकर तोड़फोड़ की।

इसी कारण से कुलसचिव ने एफआईआर नहीं करवाई और बिना एफआईआर के बीमा क्लेम नहीं हो सका। कुलपति की आपत्ति के बाद कुलदीप ने विश्वविद्यालय के वाहन प्रकोष्ठ के जरिए नहीं बल्कि स्वयं ही कार की मरम्मत करवाई और नियमविरुद्ध वित्त विभाग से मरम्मत का खर्च भी वसूल लिया।

विश्वविद्यालय अधिनियम में कुलसचिव को कार इस्तेमाल करने की पात्रता ही नहीं है, अधिनियम में कुलसचिव को मात्र पूल कार की पात्रता है अर्थात कुलसचिव को घर से लाने और घर तक पहुंचाने के लिए ही सरकारी कार दिए जाने की बात कही गई है। लेकिन कुलदीप ने यहां भी नियम विरुद्ध एक सरकारी कार अपने लिए आबंटित करवा रखा है।

कुलसचिव के कथित निजी विवाद का खर्च विश्वविद्यालय के खाते में डाल दिए जाने का आरोप है। पूरा मामला फिलहाल जांच और स्पष्टीकरण के दायरे में है।

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