मध्यप्रदेश की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म होने में महज 15 दिन बचे हैं, लेकिन सरकार अब तक अपने ही बजट का पूरा उपयोग नहीं कर पाई है। 15 मार्च 2026 तक कुल 3.30 लाख करोड़ के बजट में से सिर्फ 2.21 लाख करोड़ यानी 66.89% ही खर्च हो सका है, जबकि करीब 1.10 लाख करोड़ रुपए अब भी खर्च नहीं हुए हैं। तय समय में यह राशि उपयोग नहीं होने पर सरेंडर हो सकती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ बजट खर्च नहीं हो रहा, वहीं दूसरी तरफ सरकार लगातार कर्ज़ ले रही है। मार्च महीने में ही तीसरी बार 4100 करोड़ रुपए का कर्ज़ लिया जा रहा है और सिर्फ इसी महीने में अब तक 16,200 करोड़ रुपए का कर्ज़ उठाया जा चुका है। पूरे वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा करीब 89,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
खर्च के पैटर्न पर नजर डालें तो सरकार ने लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी और किसान सम्मान निधि जैसी मुफ्त योजनाओं पर लगभग 100% राशि खर्च कर दी है, जबकि कई विकास कार्यों में कटौती देखने को मिल रही है। कृषि विभाग में 198% खर्च हुआ, वहीं पंचायत (50.91%) और ग्रामीण विकास (43.82%) जैसे अहम क्षेत्रों में खर्च काफी कम रहा, जिससे विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं।
राज्य की आय की स्थिति भी कमजोर होती दिख रही है। जीएसटी कलेक्शन में 3% की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं एक्साइज और पेट्रोलियम से मिलने वाले राजस्व में भी कमी आई है। इससे साफ है कि सरकार की आमदनी घट रही है, लेकिन कर्ज़ का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
नीति आयोग की Fiscal Health Index 2026 रिपोर्ट ने भी मध्यप्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य का राजस्व व्यय तेजी से बढ़ रहा है और कुल राजस्व का लगभग 37% हिस्सा कर्ज़ चुकाने में खर्च हो रहा है, जबकि करीब 9.87% राशि सिर्फ ब्याज में जा रही है। यानी विकास के बजाय सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज़ निपटाने में खर्च हो रहा है।
इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री Kamal Nath ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि मध्यप्रदेश “वित्तीय अनुशासनहीनता का प्रदेश” बन गया है। उनके अनुसार एक तरफ सरकार हर महीने हजारों करोड़ का कर्ज़ ले रही है, तो दूसरी तरफ बजट सही तरीके से खर्च नहीं किया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्ज़ लेकर इवेंटबाज़ी और फिजूलखर्ची चला रही है, बजट को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जा रहा है और आम जनता के हितों की अनदेखी की जा रही है।
कुल मिलाकर प्रदेश की वित्तीय तस्वीर चिंताजनक नजर आ रही है—बजट खर्च नहीं हो पा रहा, आय घट रही है और कर्ज़ लगातार बढ़ रहा है। अब बड़ा सवाल यही है कि यह कर्ज़ विकास के लिए लिया जा रहा है या सिर्फ दिखावे के लिए।



