रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल शुक्रवार को रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on Chemicals & Fertilizers) के अध्ययन दौरे पर श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) पहुंचे। यहां उन्होंने समिति के सदस्यों, विभागीय अधिकारियों और उर्वरक व ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक में मुख्य रूप से “भू-राजनीतिक हालात का उर्वरक क्षेत्र पर असर और गैस की लगातार आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाए” तथा “जम्मू-कश्मीर में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था” जैसे विषयों पर विस्तार से बात हुई। इस दौरान वैश्विक हालात के बीच देश में ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखने पर जोर दिया गया।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने GAIL, इंडियन ऑयल (IOCL) और BPCL के अधिकारियों के साथ भी चर्चा की और कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में भारत को ऊर्जा और उर्वरक दोनों क्षेत्रों में पूरी तरह मजबूत और आत्मनिर्भर बनना जरूरी है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार के उर्वरक विभाग के अधिकारियों और NFL, RCF, IFFCO और KRIBHCO के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की। इस दौरान किसानों तक समय पर खाद पहुंचाने और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष चर्चा हुई।



अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ घाटी के दूर-दराज़ इलाकों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए “लास्ट माइल डिलीवरी सिस्टम” को और मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही किसानों को फसल के अनुसार सही और संतुलित उर्वरक इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करना भी जरूरी है।
बैठक में NPK उर्वरकों के संतुलित उपयोग, सूचना-शिक्षा-अभियान (IEC) को बढ़ाने, बागवानी फसलों में नैनो फर्टिलाइजर और विशेष पोषक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा देने और विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर भी चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में फिलहाल उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और यूरिया का स्टॉक भी ठीक स्थिति में है। NPKS उर्वरकों की आपूर्ति भी पिछले कुछ वर्षों में संतोषजनक रही है, इसलिए फिलहाल किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में पोटाश और अन्य उर्वरकों की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को मिट्टी की सेहत और संतुलित खेती के तरीकों के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है।
अंत में उन्होंने कहा कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए देश में गैस और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।






