कोरबा। खसरा नंबर 543/1 से जुड़ी भूमि के अधिकार, कथित दस्तावेजी विसंगतियों और राखड़ डैम निर्माण को लेकर उठ रहे आरोपों ने अब प्रशासनिक सक्रियता की मांग तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 12 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कोरबा को पत्र भेजकर शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई कर संबंधित पक्षों को अवगत कराने को कहा है।
उपलब्ध पत्र के अनुसार, अब्दुल सुल्तान ने 11 अगस्त 2026 को मुख्य सचिव को शिकायत भेजी थी। शिकायत में खसरा 543/1 में फर्जी दस्तावेज तैयार करने, बड़े पैमाने पर भूमि घोटाला करने, अवैध कब्जा करने और राखड़ डैम निर्माण करने के आरोप लगाए गए थे। अवर सचिव धनंजय नेताम के डिजिटल हस्ताक्षर वाले पत्र क्रमांक GENCOR-35/1312/2025-REVENUE में यह शिकायत कलेक्टर कार्यालय को भेजी गई है।
भूमि अधिकार का आधार क्या?
बालको–वेदांता प्रबंधन से अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित भूमि पर उसके अधिकार का आधार क्या है। किस क्षेत्रफल के लिए कौन-सा आवंटन, लीज या अन्य वैध दस्तावेज मौजूद है, इसकी जानकारी अभिलेखों के साथ सामने आनी चाहिए।
इसी तरह राखड़ डैम निर्माण या भूमि उपयोग के लिए किन सक्षम प्राधिकरणों से अनुमति ली गई, यह भी दस्तावेजों से साबित होना चाहिए। यदि प्रबंधन का पक्ष राजस्व अभिलेखों और स्वीकृतियों से मेल खाता है तो संबंधित आदेश, नक्शे और फाइलें सार्वजनिक होनी चाहिए। विसंगति मिलने पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।
प्रशासन से मांगा जा रहा हिसाब
शासन के पत्र के बाद कलेक्टर कार्यालय से यह बताना आवश्यक है कि प्रकरण किस अधिकारी को सौंपा गया, मूल राजस्व रिकॉर्ड मंगाए गए या नहीं और स्थल निरीक्षण हुआ या नहीं। शिकायतकर्ता के दस्तावेज लिए गए, संबंधित पक्ष से जवाब मांगा गया और पुराने-वर्तमान अभिलेखों का मिलान किया गया या नहीं—इन सवालों का उत्तर स्पष्ट होना चाहिए।

अभी उपलब्ध सामग्री में जांच रिपोर्ट या कार्रवाई का विवरण शामिल नहीं है। ऐसे में यदि जांच प्रक्रिया चल रही है तो उसकी स्थिति और समयसीमा बताई जाए। यदि कार्रवाई पूरी हो चुकी है तो निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं।
रिकॉर्ड और जमीन का मिलान हो
फर्जी दस्तावेज और अवैध कब्जे जैसे गंभीर आरोपों की जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मूल खसरा, बी-1, नक्शा, नामांतरण आदेश, आवंटन या लीज की फाइलों के साथ-साथ सीमांकन और मौके की स्थिति का भी परीक्षण होना चाहिए।
राखड़ डैम से जुड़े आरोपों में राजस्व अभिलेखों के अलावा लागू पर्यावरणीय और तकनीकी स्वीकृतियों का मिलान भी आवश्यक है। यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो जांच का दायरा केवल लाभार्थी तक न रहे। अभिलेख तैयार करने, सत्यापन करने और निर्णय लेने वालों की भूमिका भी देखी जाए।
संबंधित पक्षों से जवाब अपेक्षित
शिकायतकर्ता की मांग है कि खसरा 543/1 से जुड़े मूल एवं डिजिटल अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं, दोनों पक्षों से जवाब लिया जाए और स्वतंत्र परीक्षण के आधार पर कारणयुक्त निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाए।
यदि दस्तावेजी हेरफेर या अवैध कब्जा प्रमाणित होता है तो विधिसम्मत कार्रवाई हो। वहीं, आरोप गलत निकलने पर उन्हें खारिज करने का अभिलेखीय आधार भी सामने आना चाहिए। अब देखना होगा कि शासन के पत्र के बाद प्रशासन कितनी जल्दी ठोस जांच रिपोर्ट और जवाबदेही का हिसाब सामने रखता है।






