छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सार्वजनिक धन के खर्च को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। जनवरी 2021 से अप्रैल 2024 के बीच इस बाघ अभयारण्य में करीब 105 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि इस दौरान क्षेत्र के बड़े हिस्से में नक्सल प्रभाव के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों की पहुंच बेहद सीमित थी। आरोप है कि जमीन पर काम होने की स्पष्ट संभावना नहीं होने के बावजूद विकास और वन्यजीव प्रबंधन योजनाओं के नाम पर बड़ी रकम खर्च दिखाई गई।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में करीब 180 गांव हैं, जिनमें से 2024 से पहले लगभग 150 गांव नक्सल प्रभाव क्षेत्र में थे। क्षेत्र के करीब 80 प्रतिशत हिस्से पर प्रशासनिक नियंत्रण सीमित था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जहां अधिकारी और कर्मचारी स्वयं जाने में असमर्थ थे, वहां इतने बड़े पैमाने पर श्रमिकों की मजदूरी, सामग्री और काम की प्रगति कैसे दर्ज की गई।
सबसे चौंकाने वाला आरोप पर्यटन से जुड़े खर्चों को लेकर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां पर्यटकों की आवाजाही लगभग शून्य थी, वहां पर्यटन स्थल निर्माण के नाम पर 5 लाख रुपये और हैंडपंप के नाम पर 3.5 लाख रुपये खर्च होने का दावा दर्ज है। सवाल यह है कि जब उस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधि ही नहीं थी, तो पर्यटन स्थल किस आधार पर बनाया गया और उसका भौतिक अस्तित्व कहां है।
जल संरक्षण और भूजल स्तर बढ़ाने के नाम पर भी बड़ी रकम खर्च होने का आरोप है। जहां भूजल पहले से 10 से 20 फीट की गहराई पर उपलब्ध था, वहां अलग-अलग योजनाओं के तहत करीब 57 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा बांस सफाई में 8 करोड़, खरपतवार हटाने में 18 करोड़ और जानवरों के चारे की खेती के नाम पर 7 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया है।
पौधरोपण को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि जंगल में 342 हेक्टेयर में पौधरोपण के लिए 1.6 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर नर्वा विकास या पौधरोपण के ठोस प्रमाण नहीं मिले।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि खर्च बिना टेंडर और बिना उचित वर्क ऑर्डर के नकद भुगतान के रूप में दिखाए जाने का आरोप है। सार्वजनिक धन के उपयोग में टेंडर प्रक्रिया, वर्क ऑर्डर, मापी रिपोर्ट, मस्टर रोल, भुगतान वाउचर और भौतिक सत्यापन जैसी पारदर्शिता की शर्तें होनी चाहिए। इनमें से किसी भी कड़ी की कमी सीधे भ्रष्टाचार की आशंका पैदा करती है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण बाघ संरक्षण क्षेत्रों में से एक है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार इसका कुल क्षेत्रफल 2,799.07 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1,258.37 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 1,540.70 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। ऐसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र में धन का दुरुपयोग न केवल वित्तीय मामला है, बल्कि यह बाघ संरक्षण और स्थानीय आदिवासी समुदायों के अधिकारों पर भी असर डालता है।






