छात्रों की गूंज: MPPSC अभ्यर्थी बोले- भर्ती के इंतजार में ओवरएज हो गए, नर्सिंग छात्रा ने बताया– छः साल में भी कोर्स पूरा नहीं

Madhya Bharat Desk
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इंदौर।कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के विद्यार्थियों ने शिक्षा, भर्ती और रोजगार से जुड़ी अपनी परेशानियां साझा कीं। सतना निवासी एमपीपीएससी अभ्यर्थी अखिल भारती क्रांति ने कहा कि पिछले कई वर्षों से भर्ती प्रक्रिया में 13 प्रतिशत पदों को रोककर रखा गया है। इस वजह से हजारों अभ्यर्थी परीक्षा पास करने के बाद भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

अखिल ने बताया कि कई भर्तियों में प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू तक पूरा हो चुका है, लेकिन पदों पर नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। उनके मुताबिक, करीब 4 लाख 87 हजार अभ्यर्थी इस स्थिति से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि अदालत में मामला लंबित होने का हवाला देकर सरकार पदों को रोक रही है।

अखिल ने कहा कि लंबे समय से परिणाम और नियुक्ति का इंतजार करते-करते कई अभ्यर्थी उम्र सीमा पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे और उनके जैसे युवा एसडीएम और डीएसपी बनने की क्षमता रखते हैं, लेकिन रोजगार के बजाय बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें पार्ट टाइम नौकरी करनी पड़ रही है।

विंध्य में बेहतर शिक्षा की मांग

सतना के छात्र ने विंध्य क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए क्षेत्र के विद्यार्थियों को इंदौर और भोपाल आना पड़ता है।

अखिल के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़े शहरों में आकर कोचिंग और रहने का खर्च उठाना आसान नहीं है। उन्होंने सरकार से विंध्य क्षेत्र में बेहतर स्कूल, योग्य शिक्षक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

नर्सिंग छात्रा ने बताई छह साल की परेशानी

नर्सिंग छात्रा याशिका दानी ने कहा कि उन्होंने 2020 में चार साल का कोर्स पूरा करने की उम्मीद से दाखिला लिया था, लेकिन 2026 तक भी उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि वह अभी तीसरे वर्ष में हैं और न तो परिणाम जारी हुए हैं, न ही चौथे वर्ष की परीक्षाएं कराई जा रही हैं।

याशिका ने कहा कि नर्सिंग के हजारों विद्यार्थी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। छात्रों ने करीब एक महीने तक आंदोलन भी किया, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि परिवार के लिए फीस जुटाना मुश्किल था। फीस भरने के लिए उन्होंने कॉल सेंटर में काम किया, लेकिन कोर्स और डिग्री पूरी नहीं होने के कारण अब नौकरी मिलने में भी परेशानी हो रही है। याशिका ने कहा कि अस्पताल संचालक डिग्री नहीं होने की बात कहकर उन्हें कम वेतन पर काम करने का प्रस्ताव देते हैं।

‘शिक्षा हर छात्र का अधिकार’

राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याएं सुनने के बाद कहा कि विद्यार्थी देश की नींव होते हैं और शिक्षा कोई विलासिता नहीं, बल्कि हर छात्र का अधिकार है। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल, मिड-डे मील, कॉलेज और रोजगार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार की है।

राहुल ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि 2014 से पहले शिक्षा पर बजट का 4.6 प्रतिशत खर्च होता था, जो अब घटकर 2.6 प्रतिशत रह गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा और रोजगार से जुड़ी पूरी व्यवस्था ठीक ढंग से चलानी चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है।

छात्र ने कहा- न डरेंगे, न झुकेंगे

कार्यक्रम के दौरान एक छात्र मंच पर पहुंचा और राहुल गांधी से कहा, “न हम डरेंगे, न झुकेंगे।” छात्र ने यह बात राहुल गांधी के उस बयान के बाद कही, जिसमें उन्होंने कहा था कि व्यवस्था को सवाल पूछने वाले विद्यार्थियों से खतरा महसूस होता है।

कार्यक्रम में छात्रों से जुड़े कई वीडियो भी दिखाए गए। इनमें शिक्षा, रोजगार, राजनीति और आम लोगों की धारणाओं से जुड़े बयानों के अंश शामिल थे। राहुल गांधी ने इन वीडियो के जरिए छात्रों और अंधभक्त कहे जाने वाले लोगों के विचारों में अंतर बताने की कोशिश की।

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