बेमेतरा।छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर तो सवाल खड़े हो ही रहे थे अब स्कूलों में बाटी जाने वाली साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। छात्रों के हक से खिलवाड़ करने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है।
बेमेतरा विधायक दीपेश साहू द्वारा सेवा संकल्प अभियान के तहत शासकीय स्वामी आत्मानंद स्कूल, सिंघोरी में सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत 62 बालिकाओं को साइकिल वितरित की गई थीं। लेकिन साइकिल की गुणवत्ता इतना ज्यादा गिरी हालत में थी कि छात्र के साइकिल पर बैठते ही साइकिल डगमगाने लगा।
साइकिल बांटने के बाद सामने आया कि कुछ साइकिलों के टायरों में हवा तक नहीं थी, कहीं वॉल्व ट्यूब गायब था तो कुछ साइकिलों के पैडल, सीट, कैरियर और आगे की टोकरी टूटी हुई थी। कई साइकिलों में घंटी भी नहीं थी। छात्राओं ने बताया कि साइकिल चलाते समय हिलती है, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है।
साइकिल मिलने के बाद छात्राओं ने जब इन्हें चलाना शुरू किया तो कई साइकिलों में खामियां सामने आईं। छात्राओं का कहना है कि खराब गुणवत्ता के कारण साइकिल चलाते समय हिलती है और उसे नियंत्रित करने में परेशानी होती है।
मामले में स्कूल के प्राचार्य संजय प्रसाद ने भी माना कि कुछ साइकिलों में गुणवत्ता संबंधी समस्या है। उन्होंने कहा कि ऐसी साइकिलों को मरम्मत कराने के बाद बच्चों को दिया जाएगा।
वहीं मामले की जानकारी मिलने पर DEO अभय जायसवाल ने प्राचार्य से सवाल किया कि बिना भौतिक सत्यापन के खराब साइकिलों को हैंडओवर क्यों लिया गया। इस सवाल के बाद साइकिलों की सप्लाई से लेकर स्कूल में हैंडओवर तक की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब सवाल यह है कि छात्राओं को साइकिल सौंपने से पहले उनकी गुणवत्ता और स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई? सरकारी योजना के तहत बांटी जाने वाली साइकिलों के भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी किसकी थी?






