रायपुर:छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक अधिकारियों की सहूलियतपसंद और दिखावटी कार्यशैली ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में स्वदेशी के दावों की हवा निकाल दी है। प्रदेश भर में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत 1.50 करोड़ दीये जलाने का सरकारी ढोल तो खूब पीटा गया, लेकिन आयोजन की कड़वी हकीकत यह रही कि अफसरों ने अपनी सुस्ती और वातानुकूलित दफ्तरों वाली सोच के चक्कर में ‘वोकल फॉर लोकल’ का सरेआम सौदा कर दिया।
बड़े नेताओं की चाटुकारिता में लगे अधिकारियों ने स्थानीय कारीगरों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया।
राजधानी रायपुर के सबसे हाई-प्रोफाइल मरीन ड्राइव (तेलीबांधा) पर अफसरों ने स्थानीय कुम्हारों के दीयों के बजाय चाइनीज इलेक्ट्रिक दिया जलाई।

वहीं राजधानी के दूसरे जगहों पर दिखावे के लिए मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल तो हुआ, लेकिन तेल-बाती के प्रबंधन और मेहनत से बचने के लिए अफ़सरों ने शॉर्टकट अपनाते हुए उनके भीतर चीनी वैक्स (मोम) के रेडीमेड दीये रखवा दिए।
अफ़सरशाही की इस कारगुजारी की हद तो तब हो गई, जब लापरवाह अधिकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी यही मोम वाला दीया जलवा दिया। इस पूरे घटनाक्रम की पोल तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं।
भारी मात्रा में तेल-बाती का प्रबंध करने और मेहनत से बचने के लिए अधिकारियों ने शॉर्टकट अपनाते हुए विदेशी सामानों से मोदी के मेक इन इंडिया के सपने का सौदा कर दिए।
प्रदेश भर में ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान के तहत 1.50 करोड़ दीये जलाने का प्रशासनिक ढिंढोरा तो खूब पीटा गया, लेकिन हकीकत यह रही कि अफ़सरों की सुस्ती और ‘एसी दफ़्तर’ वाली सोच ने ‘वोकल फॉर लोकल’ के नारे को कागजों तक सीमित कर दिया।






