रायपुर। सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में लोक निर्माण विभाग (PWD) की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अच्छी हालत में मौजूद रिसेप्शन और कॉन्फ्रेंस हॉल को अनावश्यक रूप से तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। इससे सरकारी खजाने पर लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने की बात कही जा रही है।
एक तरफ जहां ठीक-ठाक सुविधाओं को तोड़कर नए निर्माण पर पैसा खर्च किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम लोगों के लिए मौजूद जरूरी सुविधाओं की हालत खराब है।
कॉफी हाउस में अव्यवस्था, बैठने तक की जगह नहीं
सर्किट हाउस परिसर में संचालित इंडियन कॉफी हाउस में चाय, कॉफी, पानी की बोतल और खाने की कीमतें काफी ज्यादा हैं। इसके बावजूद यहां की बैठक व्यवस्था ठीक नहीं है। हॉल में क्षमता से ज्यादा कुर्सियां लगा दी गई हैं, जिससे लोगों को बैठने और आने-जाने में परेशानी होती है।

कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि लोगों को एक-दूसरे से टकराते हुए निकलना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाला संबंधित विभाग आखिर इस मामले में कब कार्रवाई करेगा?
खाने की थाली पर टपक रहा गंदा पानी
सबसे गंभीर मामला कॉफी हाउस की साफ-सफाई और स्वास्थ्य से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि हॉल की छत से पिछले कई दिनों से गंदा पानी रिस रहा है। आरोप है कि ऊपर के कमरों से निकलने वाला गंदा पानी छत के रास्ते नीचे हॉल में टपक रहा है और कई बार लोगों की खाने की थाली और व्यंजनों तक पहुंच रहा है।
अगर यह स्थिति सही है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।

इसके अलावा कॉफी हाउस के ऊपर लगी पानी की टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में पेयजल की स्वच्छता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतों के बाद भी समस्या जस की तस
कॉफी हाउस के कर्मचारियों के मुताबिक, छत से पानी रिसने और पानी की टंकी की सफाई को लेकर कई बार PWD अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
कर्मचारियों का कहना है कि सर्किट हाउस की दूसरी समस्याओं को लेकर भी पहले शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
एक तरफ निर्माण, दूसरी तरफ बदहाल व्यवस्था
एक ओर सरकारी पैसे से ठीक स्थिति में मौजूद सुविधाओं को तोड़कर नए निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उसी परिसर में लोग गंदे पानी, अव्यवस्था और अस्वच्छ माहौल के बीच भोजन करने को मजबूर हैं।
अब सवाल यही है कि सरकारी पैसे की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए—जरूरी सुविधाओं की मरम्मत और सुधार या फिर ठीक-ठाक निर्माण को तोड़कर दोबारा बनाना?






