जगदलपुर।रायपुर के नकटी गांव में ग्रामीणों की बेदखली को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की भावुक अपील का असर अब साफ दिखने लगा है। एक के बाद एक कांग्रेस विधायक नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी में आवास नहीं लेने की बात खुलकर कह रहे हैं। अब तक चार विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर साफ कर दिया है कि गरीबों के आंसुओं पर बने घर में वे नहीं रहेंगे। उनका कहना है कि उन्हें नकटी गांव के लोगों की आह नहीं लेनी।
इन चार विधायकों में तीन महिला विधायक भी शामिल हैं। नकटी गांव में प्रशासन द्वारा तोड़े गए घरों के मलबे के बीच प्रभावित परिवारों का दर्द फिर सामने आया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे मर जाएंगे, लेकिन गांव नहीं छोड़ेंगे। उनका आरोप है कि बड़े लोगों के लिए आवास बनाने गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार गरीबों के घर उजाड़कर विधायक और अधिकारियों के लिए आवास बनाने की तैयारी कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि गरीबों के घर उजाड़ना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने गरीब परिवारों के घर तोड़ दिए, लेकिन प्रभावशाली लोगों के कब्जों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बैज ने मांग की है कि जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं, उन्हें पूरा मुआवजा दिया जाए। साथ ही जिन परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है, उसकी भी भरपाई की जाए। उनका कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
भाजपा नेताओं की जमीन की कीमत बढ़ाने का खेल?
बताया जा रहा है कि पिछले एक साल से ग्रामीणों को जगह खाली करने के नोटिस दिए जा रहे थे। नकटी गांव में करीब 66 एकड़ क्षेत्र में आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारियों और विधायकों के लिए आवासीय कॉलोनी का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसमें चारागाह की करीब 10 एकड़ जमीन पर 35-40 साल से बसे ग्रामीणों को हटाने की योजना बनाई गई।
यहां पीएम आवास और इंदिरा आवास योजना के तहत भी कई मकान बने हुए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मकान तोड़ने से पहले पूरी जांच क्यों नहीं की गई। आरोप है कि प्रशासन ने बिना पूरी रिपोर्ट के कार्रवाई कर दी।
ग्रामीणों और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यहां हीरा ग्रुप समेत कई प्रभावशाली लोगों के भी अवैध कब्जे हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ गरीबों पर हुई। यह भी आरोप है कि यहां कई बड़े भाजपा नेताओं की जमीनें हैं और पूरे प्रोजेक्ट के जरिए उनकी जमीनों की कीमत बढ़ाने का खेल खेला जा रहा है।
बताया जा रहा है कि नाले के पास से एयरपोर्ट तक और वहां से प्रस्तावित आवासीय परिसर तक सड़क बनाने का प्रोजेक्ट भी पास हुआ है। आरोप है कि पूरे मामले में कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट की छुट्टी वाले दिन सुबह-सुबह ग्रामीणों को घेरकर कार्रवाई की गई।
दोबारा बनेंगे घर, कांग्रेस साथ है: बैज
नकटी गांव में कार्रवाई के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने टूटे हुए घरों का जायजा लिया और मौके पर चौपाल लगाकर लोगों की बात सुनी।
कांग्रेस ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ी जाएगी। जल्द ही कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात करेगा और विधानसभा के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा उठाया जाएगा।
इस दौरान दीपक बैज ने कहा, कांग्रेस प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध करती है। घर टूट गया तो क्या हुआ, घर फिर बनेगा। कांग्रेस हर लड़ाई में आपके साथ खड़ी है।
ये विधायक नहीं लेंगे आवास
नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद सियासत और गरमा गई है। सोमवार को प्रशासन ने प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए करीब 80 घरों को तोड़ा। इसके बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

दीपक बैज की अपील के बाद कांग्रेस के चार विधायकों ने बड़ा फैसला लिया है। बिंद्रानवागढ़ से विधायक जनक राम ध्रुव, सराईपाली विधायक चातुरी नंद, बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राण लहरे और लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा है।

इन विधायकों ने मांग की है कि नकटी गांव की बजाय नया रायपुर में किसी दूसरी उपयुक्त जगह पर विधायक कॉलोनी बनाई जाए। उनका कहना है कि नकटी ग्राम पंचायत में प्रस्तावित कॉलोनी का ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं, इसके बावजूद प्रशासन जमीन खाली करा रहा है, जिससे लोग बेहद आहत हैं।

विधायक चातुरी नंद ने भी पत्र में साफ लिखा है कि वे नकटी गांव के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी हैं। उन्होंने कहा, गरीबों का घर उजाड़कर मुझे विधायक आवास नहीं चाहिए।




