बिहार:2024 लोकसभा चुनाव में 64 लाख फर्जी मतदाताओं के खुलासे ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। जनमानस में चर्चा है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद राज्य के 40 सांसदों की सदस्यता रद्द कर पुनः चुनाव कराना जरूरी है।
गांव-गांव की चौपालों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक यह मुद्दा छाया हुआ है। लोगों का कहना है कि जब मतदाता सूची में ही भारी पैमाने पर डुप्लिकेट, मृत और फर्जी नाम मिले हैं, तो चुनाव नतीजों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
चुनाव आयोग की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मामला कानूनी लड़ाई तक पहुंचता है, तो 2024 के नतीजों में बड़े बदलाव संभव हैं।
विपक्षी दलों ने इस पर उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जबकि सत्तापक्ष इसे “बिना प्रमाण की अफवाह” बता रहा है।
पृष्ठभूमि:
हाल के महीनों में बिहार के कई जिलों में मतदाता सूची सत्यापन के दौरान बड़े पैमाने पर फर्जी और डुप्लिकेट नाम सामने आए हैं। इस खुलासे ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।







