पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक कमलनाथ ने मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्कूल शिक्षा की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है और इसका सबसे बड़ा खामियाजा बच्चों के भविष्य को भुगतना पड़ रहा है।
कमलनाथ ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में बारहवीं कक्षा तक पहुँचते-पहुँचते करीब 55 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। उनके मुताबिक यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इसका मतलब है कि प्रदेश के आधे से ज्यादा बच्चे उच्च शिक्षा तक पहुँच ही नहीं पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर बना रही है। प्रदेश में करीब 52 हजार शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जबकि लगभग 7 हजार स्कूल ऐसे हैं जहाँ सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे पूरी पढ़ाई चल रही है। ऐसे हालात में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना मुश्किल हो गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो शिक्षक वर्तमान में स्कूलों में कार्यरत हैं, उन्हें पढ़ाने के अलावा कई प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दिया जाता है। इससे उनका पूरा ध्यान शिक्षा पर नहीं रह पाता। उन्होंने दावा किया कि कई शिक्षक अपने ही विषय की परीक्षा में अपेक्षित अंक हासिल नहीं कर पा रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
कमलनाथ ने कहा कि यदि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों का पढ़ाई से दूर होना स्वाभाविक है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार हर स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति की जाए और शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य लेना बंद किया जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य के भविष्य की नींव होती है और यदि आज बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में प्रदेश को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।



