रायपुर। छत्तीसगढ़ी भवन, हांडीपारा में आयोजित एक बैठक के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन प्रमुख अनिल दुबे ने प्रदेश की जमीनों को लेकर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की शासकीय, आदिवासी, काबिज काश्त, वन, मठ और धार्मिक संस्थानों की भूमि को बाहरी लोगों ने बड़े पैमाने पर खरीदकर कब्जे में ले लिया है।
आरोप है कि इस पूरे मामले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीनों की रजिस्ट्री और बिक्री की गई है, जिसमें प्रशासनिक तंत्र के कुछ स्तरों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, जिलाधीश से लेकर पटवारी तक कुटरचित दस्तावेज बनवाकर बाहरी शोषकों के हुए साझेदारी के लिए छत्तीसगढ़ के लगभग 55 लाख एकड़ जगह खाली करवाकर मुक्त करवाने का फैसला लिया गया।
उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में “छत्तीसगढ़ महतारी अस्मिता रथ यात्रा” के माध्यम से इस मुद्दे को लेकर बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। यह यात्रा 23 मई को आयोजित होने वाली बैठक में आगे की रणनीति तय करेगी।
बैठक में प्रमुख अनिल दुबे के साथ लालाराम वर्मा, श्यामू राम सेन, अशोक कश्यप, रूप सिंह निषाद, गंगा राम साहू, हिमांशु चक्रवर्ती, यश कामले, अंकित साहू, भूपेंद्र साहू, और कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने जमीनों की सुरक्षा और कथित अवैध कब्जों की जांच की मांग की। अनिल दुबे ने मुख्यमंत्री से इस मामले को गंभीरता से लेने और तत्काल कार्रवाई करने की अपील भी की।



