मध्य प्रदेश की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि महिला आरक्षण के नाम पर लगातार झूठ और भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल हो रहा है और अब विधानसभा जैसे सम्मानित सदन का भी राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करने की तैयारी की जा रही है।
कमलनाथ ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी ने कभी भी महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया। उनका कहना है कि लोकसभा में जो संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका था, वह केवल महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि उसमें परिसीमन (delimitation) से जुड़ी जटिलताएं भी शामिल थीं।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि साल 2023 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल का कांग्रेस ने खुलकर समर्थन किया था। ऐसे में भाजपा का कांग्रेस पर आरोप लगाना पूरी तरह से भ्रामक है।
कमलनाथ ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि यदि वास्तव में महिला आरक्षण लागू करने की मंशा है, तो इसे परिसीमन से जोड़े बिना तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि इस दिशा में कांग्रेस हमेशा सहयोग देने के लिए तैयार रही है।
इसके साथ ही उन्होंने 27 अप्रैल को मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यह जनता के पैसे की बर्बादी है और सदन की गरिमा के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने सुझाव दिया कि अगर विशेष सत्र बुलाना ही है, तो उसे राज्य में बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और गैस संकट जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया जाना चाहिए, जिससे आम जनता को राहत मिल सके।



