छत्तीसगढ़ की सियासत में एक छोटे से बदलाव ने बड़ा राजनीतिक संकेत दे दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के काफिले में अब तक नजर आने वाली टोयोटा फार्च्यूनर की जगह अब महिंद्रा स्कॉर्पियो ने ले ली है। प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे काफिले में 6 नई बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो गाड़ियों ने कार्यकर्ताओं से लेकर मीडिया तक सभी का ध्यान खींच लिया।
दरअसल, अब तक सीएम साय पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में खरीदी गई फार्च्यूनर का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन अब उसकी जगह पूरी तरह स्कॉर्पियो फ्लीट ला दी गई है। इस बदलाव पर मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि पुरानी गाड़ियां तकनीकी रूप से कमजोर हो गई थीं और कई बार बीच रास्ते में बंद हो जाती थीं, इसलिए सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए यह फैसला लिया गया।
हालांकि, इस बदलाव को सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। भाजपा खेमे में इसे “स्वदेशी ब्रांड” और “मेक इन इंडिया” से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है।
अगर पुराने दौर की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के 15 साल के कार्यकाल में सरकारी काफिलों में टाटा सफारी का दबदबा था। कलेक्टर से लेकर मंत्रियों तक, सफारी एक तरह से सरकारी पहचान बन गई थी। उस समय विदेशी गाड़ियां भी मौजूद थीं, लेकिन प्राथमिकता “देसी SUV” को ही दी जाती थी।
अब साय सरकार में स्कॉर्पियो की एंट्री को उसी परंपरा की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार खुद मुख्यमंत्री की गाड़ी भी बुलेटप्रूफ स्कॉर्पियो में बदल दी गई है, जो सुरक्षा के लिहाज से भी अहम कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ की सियासत में यह “गाड़ी बदलाव” एक बड़ा प्रतीक बन गया है—जहां रमन सिंह की सफारी, भूपेश बघेल की फार्च्यूनर और अब साय की स्कॉर्पियो तीन अलग-अलग दौर और सोच को दर्शा रही हैं। फिलहाल, यह साफ है कि सियासत में अब गाड़ियां भी सिर्फ सफर का जरिया नहीं, बल्कि संदेश देने का माध्यम बन चुकी हैं।







