रायपुर, 10 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ कांग्रेस में आंधी-तूफान मच गया है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने जिला कार्यकारिणी की सूची को जारी होते ही महज दो घंटे में निरस्त कर दिया। जितनी तेजी से ये सूची बाहर आई, उतनी ही रफ्तार से गाज गिर पड़ी। दो घंटे से तर्क-वितर्क का दौर चल रहा है, और सवाल वही—क्या इसके पीछे कोई गहरी मनसिकता है?
पिछले दो महीने पहले दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों को अपनी मर्जी से कार्यकारिणी गठन का पूर्ण अधिकार दिया था। लेकिन बैज साहब ने इसे सिरे से नकार दिया। बनानेवालों पर ही वज्र गिरना—ये तो कांग्रेस की आंतरिक राजनीति का नया अध्याय है!
दिल्ली का फरमान vs बैज का ठेंगा!
दिल्ली से आया ये अधिकार जिला अध्यक्षों के लिए ऐतिहासिक था। सोचा था संगठन सुधार के बाद जिला स्तर पर टिकट वितरण का हक मिलेगा, और कार्यकर्ताओं को मजबूती। लेकिन हालत ये हो गई कि बेचारे जिला अध्यक्ष वार्ड अध्यक्षों की सूची तक घोषित नहीं कर पा रहे। बैज ने साफ संकेत दे दिया—प्रदेश में उनकी ही ‘चलने वाली’ राजनीति चलेगी।
पूरे देश में शायद पहली बार ऐसा हुआ जब केंद्रीय नेतृत्व के फरमान को प्रदेश अध्यक्ष ने इतने खुले तौर पर ठुकरा दिया। दो घंटे का ड्रामा, निरस्ती का तूफान—कार्यकर्ता हैरान हैं। क्या वार्ड अध्यक्ष इतने सशक्त और प्रसिद्ध हैं कि उनकी लिस्ट पर इतनी जल्दी गदा गिर गई?
बैज की स्वराज्य राजनीति या सत्ता संघर्ष?
सूत्र बताते हैं कि बैज प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने के चक्कर में हैं। जिला कार्यकारिणी गठन का ये विवाद केंद्रीय कमान को खुला संदेश है—रायपुर से दिल्ली को चैलेंज! कांग्रेस के अंदरूनी कलह अब चरम पर पहुंच गया है। कार्यकर्ता सवाल उठा रहे: अगर जिला अध्यक्ष इतना कमजोर हैं कि वार्ड स्तर पर फैसला तक नहीं ले पाते, तो संगठन का भविष्य क्या? बैज की ये ‘आंधी-तूफान की गति’ पार्टी को कहां ले जाएगी? बनानेवाले पर ही वज्र—ये सत्ता की भूख का नंगा नाच है।
आगे क्या? फेरबदल की भविष्यवाणी
ये घटना छत्तीसगढ़ कांग्रेस की आंतरिक जंग को साफ उजागर करती है। टिकट वितरण पर ब्रेक लगना तय है। क्या बैज दिल्ली के खिलाफ खुली बगावत करेंगे? या केंद्रीय नेतृत्व अब रायपुर में हस्तक्षेप करेगा? कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। संगठन श्रम के नाम पर ये सत्ता का खेल बन गया। आने वाले दिनों में बड़े फेरबदल की पूरी संभावना। कांग्रेस को आत्ममंथन की जरूरत—वरना छत्तीसगढ़ में BJP को फायदा ही होगा!







