रायपुर। छत्तीसगढ़ में D.Ed प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का लंबा इंतजार अब बेचैनी में बदलता जा रहा है। करीब तीन महीने से जारी उनका आंदोलन आज 98वें दिन में पहुंच गया, और इसके साथ ही विरोध का तरीका भी पहले से कहीं ज्यादा भावुक और गंभीर नजर आया।
तूता धरना स्थल के पास स्थित तालाब में आज कई अभ्यर्थी गर्दन तक पानी में उतर गए। यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उस दर्द और निराशा की झलक थी, जो लगातार अनदेखी के कारण उनके भीतर जमा होती जा रही है। पानी में खड़े ये युवा सरकार से एक ही बात कह रहे थे—हमें हमारा हक दीजिए।
बताया जा रहा है कि कुछ अभ्यर्थियों ने जल समाधि लेने तक की कोशिश की, जिसे वहां मौजूद साथियों और प्रशासन ने रोक लिया। यह दृश्य वहां मौजूद हर शख्स को झकझोरने वाला था।
इन अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। लेकिन अब उन्हें लगने लगा है कि उनकी आवाज कहीं दबकर रह गई है। उनकी मुख्य मांग साफ है—2300 खाली पदों पर जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके और वर्षों की मेहनत बेकार न जाए।
आंदोलन कर रहे युवाओं का दर्द सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके आत्मसम्मान और परिवार की उम्मीदों से भी जुड़ा हुआ है। लगातार बढ़ता यह आंदोलन अब सरकार के लिए भी एक बड़ा सवाल बनता जा रहा है कि आखिर इन युवाओं को कब तक इंतजार करना पड़ेगा।







