रायपुर नगर निगम के बजट सत्र की शुरुआत इस बार शांत नहीं रही। जैसे ही सामान्य सभा की बैठक शुरू हुई, कांग्रेस पार्षदों ने विरोध का जोरदार प्रदर्शन करते हुए माहौल गरमा दिया।
हाथों में अधूरे वादों के पोस्टर और नारों के साथ, पार्षद गाने गाते हुए सदन में पहुंचे। उनका कहना था कि शहर के कई अहम वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं, और इन्हीं मुद्दों पर पहले चर्चा जरूरी है।
स्थिति को संभालने के लिए सभापति ने हस्तक्षेप करते हुए पार्षदों से पोस्टर हटाने की अपील की और चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाएगी। लेकिन विपक्ष अपने रुख पर अड़ा रहा और स्पष्ट कहा कि जब तक अधूरे वादों पर चर्चा नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा।
इस बीच, महापौर मीनल चौबे द्वारा लगभग 1600 करोड़ रुपये का बजट पेश किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही मेयर-इन-काउंसिल (MIC) के 17 अलग-अलग एजेंडों पर भी चर्चा होनी है, जिनमें शहर के विकास और नामकरण से जुड़े अहम फैसले शामिल हैं।
इन प्रस्तावों में कोतवाली चौक का नाम बदलकर जैन स्तंभ चौक करने का मुद्दा भी प्रमुख है। इसके अलावा, खासला स्कूल के सामने विस्थापित 69 दुकानदारों को क्रिस्टल आर्केड के पास व्यवस्थित करने की योजना पर भी विचार किया जाएगा।
मनोरंजन क्षेत्र से जुड़ा एक प्रस्ताव भी चर्चा में है, जिसमें मॉल में फिल्मों के प्रदर्शन का शुल्क 200 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रति फिल्म करने की बात कही गई है।
एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव के तहत पुराने महापौर बंगले को अस्थायी रूप से प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कार्यालय के रूप में उपयोग करने की योजना है।
अधिकारियों के मुताबिक, यह सत्र करीब एक घंटे तक चल सकता है। इस दौरान पार्षद अपने-अपने वार्ड से जुड़े सवाल उठाएंगे। प्रश्नकाल के बाद मुख्य बजट पर विस्तार से चर्चा होगी, जिसमें शहर के बुनियादी ढांचे और विकास को लेकर नई घोषणाओं की उम्मीद जताई जा रही है।



