छत्तीसगढ़ का नाम धान के कटोरे से जुड़ा था, लेकिन विष्णु देव साय की भाजपा सरकार में अफीम के खेत फल-फूल रहे हैं। चौंकाने वाली सच्चाई—हर जगह भाजपा के ही पदाधिकारी सक्रिय!
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में जोरदार तंज कसा: “रामराज्य में दूध मिला, कृष्णराज्य में दही बंटा, लेकिन साय के राज में अफीम! क्या भाजपा छत्तीसगढ़ को नशे की नदी में बहाना चाहती है? चार जगहों पर बड़े पैमाने पर अफीम की खेती साफ बता रही—सरकार का मकसद क्या?”
भाजपा पदाधिकारियों का काला खेल
सबसे पहले दुर्ग जिले में भाजपा का एक प्रमुख पदाधिकारी अफीम की खेती करवा रहा है।
उसके निर्देश पर खेतों में फसल लहलहा रही, लेकिन पुलिस की नजर में नहीं आया। बलरामपुर में भी वही कहानी—भाजपा पदाधिकारी ने किसानों को जमीन उपलब्ध करवाई, अफीम की पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर। तमनार (कोरबा) में साय सरकार के पूर्ण संरक्षण में अफीम के खेत हरे-भरे हैं, स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता सीधे संलिप्त। सबसे बड़ा खुलासा धमतरी के नगरी-सिहावा में—भाजपा पदाधिकारी के 20 एकड़ फार्महाउस पर अफीम की फसल लगी थी। मुखपत्र ने बयान दिया तो रातोंरात बुलडोजर चला दिया गया। बघेल का सवाल: “बुलडोजर से सबूत मिटेगा? ये तो भाजपा की छिपाने की चाल है!”
धान से अफीम की ओर: राज्य का पतन?
छत्तीसगढ़ कभी धान उत्पादन में देशभर का गौरव था। अब अफीम जैसी अवैध फसलें युवाओं को नशे की गिरफ्त में ले रही हैं। विशेषज्ञ चेताते हैं—ये न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक विपदा। बघेल ने कहा, “ये चार जगहें तो सामने आ गईं, राज्य के हर कोने में कितनी ऐसी खेती चल रही होगी? भाजपा बताए—अपने कार्यकर्ताओं का अफीम कनेक्शन क्यों?”
जनता की पुकार: केंद्रीय जांच हो!
कांग्रेस ने सीबीआई या एनसीबी से जांच की मांग की। साय सरकार की चुप्पी सवालों को जन्म दे रही। क्या रामराज्य का दावा अब नशे पर टिका है? जनता जागे, वरना छत्तीसगढ़ का भविष्य खतरे में। भाजपा के ‘राम भक्त’ अफीम के भक्त बन गए—ये विडंबना या षड्यंत्र?






