ईरान में युद्ध से गहराया मानवीय संकट: 32 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर, हमलों में 30 से ज्यादा अस्पताल क्षतिग्रस्त

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

अमेरिका और इस्राइल के लगातार सैन्य हमलों के बीच ईरान में मानवीय संकट तेजी से गंभीर होता जा रहा है। युद्ध के कारण लाखों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित इलाकों की तलाश में पलायन कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार अब तक लगभग 32 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या राजधानी तेहरान और अन्य बड़े शहरों के नागरिकों की है, जो जान बचाने के लिए देश के उत्तरी हिस्सों और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं।

लाखों परिवारों पर युद्ध का असर

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) ने बताया कि 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। एजेंसी का अनुमान है कि अब तक करीब 6 से 10 लाख ईरानी परिवार अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।

यूएनएचसीआर की अधिकारी अयाकी इतो ने कहा कि यदि युद्ध की स्थिति इसी तरह बनी रही तो आने वाले दिनों में विस्थापन का आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। इससे मानवीय सहायता और राहत की जरूरतें भी काफी बढ़ जाएंगी।

तेहरान सहित कई शहरों में भारी तबाही

राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। पूर्वी तेहरान के कुछ इलाकों में कई बहुमंजिला इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं। कई स्थानों से शव भी बरामद किए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है।

अस्पतालों पर भी पड़ा असर

ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री अली जाफरियान ने बताया कि हाल के हमलों के कारण घायल नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अधिकतर घायलों में आम लोग शामिल हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार हमलों में अब तक 30 से अधिक अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है।

जवाबी हमले और ऊर्जा संकट का खतरा

ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं।

इसके साथ ही ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का कदम उठाया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि वैश्विक तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में गंभीर संकट पैदा हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक तनाव भी बढ़ सकता है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment