दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बड़ी राहत: देश में उत्कृष्टता केंद्र 8 से बढ़कर 15 हुए

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली:देश में दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए इलाज की सुविधाएं लगातार बेहतर की जा रही हैं। केंद्र सरकार ने संसद को जानकारी दी है कि राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (NPRD) के लागू होने के बाद देश में दुर्लभ बीमारियों के लिए उत्कृष्टता केंद्रों की संख्या 8 से बढ़कर 15 हो गई है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि इन केंद्रों के विस्तार के लिए सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े स्तर पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए हैं।

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से मार्च 2025 तक करीब 26,400 लाख रुपये उत्कृष्टता केंद्रों के लिए आवंटित किए गए, जबकि वर्ष 2025-26 के लिए 6,184 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। हालांकि, दुर्लभ बीमारियों जैसी गंभीर और जटिल समस्याओं से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 में राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति लागू की।

इस नीति के तहत दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों को प्रति मरीज 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसमें समूह-3 की दुर्लभ बीमारियां भी शामिल हैं, जिनका इलाज बेहद महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है।

जाधव ने बताया कि मरीजों का उपचार संबंधित उत्कृष्टता केंद्र की विशेष दुर्लभ रोग समिति की सिफारिशों के आधार पर, तय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है। सरकार का दावा है कि इन केंद्रों की संख्या बढ़ने से देशभर में दुर्लभ बीमारियों के इलाज तक मरीजों की पहुंच पहले से बेहतर हुई है।

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